बोर्ड ने इस पॉलिसी ड्राफ्ट पर टिप्पणी करने के लिए राज्यों को पत्र भी लिखा है। इस ड्राफ्ट में बोर्ड ने कहा है कि तकनीक के इस्तेमाल से पढ़ने और पढ़ाने के तरीके को आसान बनाया जाए ताकि परीक्षा देना सभी को लिए सुलभ हो सके।
इसके साथ ही हाजिरी में छूट उन बच्चों को दी जाएगी जो कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित हैं, या फिर दूर दराज के इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा उन बच्चों को भी छूट दी जाएगी जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और कक्षा तक पहुंच नहीं सकते। ऐसे बच्चों को स्कूल आने की जरूरत नहीं होगी। वह प्रत्येक सेशन के बाद ऑवलाइन टेस्ट दे सकेंगे। बच्चों को ऑनलाइन क्लास कंटेंट भी मिलेगा।
46 हितधारकों को किया आमंत्रित
विशेष जरूरत वाले बच्चों को लिए ये ड्राफ्ट इसलिए तैयार किया गया है ताकि उनके लिए एक जैसा सिस्टम बन सके। इसी के तहत सीबीएसई ने परामर्श के लिए 46 हितधारकों को आमंत्रित भी किया। जिसके बाद पॉलिसी का ड्राप्ट तैयार करने के लिए 4 जुलाई के सत्र में सभी ने हिस्सा लिया।
सत्र में हिस्सा लेने वाले हितधारकों में 20 एजुकेशन बोर्ड्स, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग, रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया, सामाजिक न्याय मंत्रालय, नेशनल बुक ट्रस्ट, मुख्य दिव्यांग आयुक्त का कार्यालय, अलिपुर की एसडीएम इरा सिंघल (2015 की आईएएस टॉपर जो खुद भी दिव्यांग हैं), नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डेफ और अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट शामिल थे।
पॉलिसी ड्राफ्ट में ये भी कहा गया है कि सभी स्कूलों की बिल्डिंग इन बच्चों के अनुकूल होनी चाहिए। स्कूल का सही इन्फ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए, बिल्डिंग के हर हिस्से में रैम्प या लिफ्ट होनी चाहिए और सुलभ शौचालय का निर्माण भी किया जाना चाहिए।