केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को एनएसई को-लोकेशन मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण की जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि अपराध की प्रकृति काफी गंभीर है, जिसका वित्तीय स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव पड़ रहा है।
सीबीआई ने अदालत में अपने जवाब में कहा कि आवेदक चित्रा रामकृष्ण अत्यधिक प्रभावशाली हैं और वह दस्तावेज/डिजिटल साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं। यही नहीं, जमानत पर रिहा होने पर गवाहों के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं।
जांच एजेंसी ने कहा, याचिकाकर्ता प्रासंगिक अवधि के दौरान एनएसई की एक उच्च पदस्थ अधिकारी थी। उनके खिलाफ आरोप लगाने वाले सबूत पहले ही सामने आ चुके हैं। जमानत देने के परिणाम जांच पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे।
इसमें यह भी कहा गया है कि को-लोकेशन की स्थापना और उसमें चित्रा रामकृष्ण द्वारा निभाई गई भूमिका से संबंधित साजिश का पता लगाने के लिए अन्य गवाहों की जांच चल रही है। वह दिन-प्रतिदिन के मामलों और एनएसई में अपने कार्यकाल के दौरान लागू किए गए संपूर्ण सेटअप को देख रही थीं।
जवाब में यह भी कहा गया है कि मामला एनएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आरोपों से संबंधित है, जहां कारोबारी सदस्यों द्वारा को-लोकेशन सुविधा का दुरुपयोग करके अनुचित लाभ कमाया गया है। को-लोकेशन सेटअप के लिए अनुचित पहुंच को सुगम बनाने में शीर्ष अधिकारियों की भूमिका और उत्तरदायित्व की जांच चल रही है।
मामला 21 अप्रैल तक टाला
जांच एजेंसी ने शुक्रवार को मामले में विशेष अदालत में अपना जवाब दाखिल किया। सीबीआई जज संजीव अग्रवाल ने सुनवाई की आखिरी तारीख पर जमानत याचिका में जांच एजेंसी से दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा था। संबंधित वकीलों द्वारा बहस के लिए समय मांगने के बाद मामले को 21 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया।