अस्पताल के एक अधिकारी के मुताबिक हर दिन लगभग 500-600 किलोग्राम वजनी इस्तेमाल की हुई सीरिंज, रबर के दस्ताने, हाथ के दस्ताने और सलाइन की बोतलें ट्रीटमेंट के लिए फर्म को भेजी जाती थीं।
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितता की जांच कर रही सीबीआई ने गुरुवार को बड़ा दावा किया। सीबीआई ने कहा कि अस्पताल से मेडिकल वेस्ट लेने वाली फर्म और अन्य अस्पतालों में वेस्ट के निस्तारण के लिए कोई ट्रीटमेंट प्लांट नहीं था। इसके बाद भी कंपनी से अनुबंध किया गया।
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सीबीआई अधिकारी ने बताया कि 2019 में जिस कंपनी से अनुबंध किया गया, वह ज्यादा प्रसिद्ध नहीं थी। इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने के चलते 2023 में सरकार ने कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया। बताया जाता है कि फिर कंपनी ने उत्तर प्रदेश में ट्रीटमेंट प्लांट चलाने वाली दूसरी कंपनी से समझौता किया और दोबारा से आरजी कर से अनुबंध जीत लिया।
अस्पताल के एक अधिकारी के मुताबिक हर दिन लगभग 500-600 किलोग्राम वजनी इस्तेमाल की हुई सीरिंज, रबर के दस्ताने, हाथ के दस्ताने और सलाइन की बोतलें ट्रीटमेंट के लिए फर्म को भेजी जाती थीं। कंपनी को नियमों के अनुसार अनुबंध दिया गया था। कंपनी ने दावा किया था कि वह पर्यावरण विभाग से मंजूरी मिलने के चार महीने के भीतर प्लांट स्थापित कर देगी। लेकिन कंपनी ने प्लांट का निर्माण नहीं किया।
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कोलकाता हाईकोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। आरजी कर मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल रहने के दौरान संदीप घोष पर वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोप लगे थे। ये आरोप आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली ने लगाए थे।
अख्तर अली ने अपनी शिकायत में संदीप घोष पर अस्पताल में लावारिस शवों की तस्करी, बायो-मेडिकल कचरे के निपटान में भ्रष्टाचार, निर्माण निविदाओं में भाई-भतीजावाद करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत मिलने के बाद कोलकाता पुलिस ने 19 अगस्त को संदीप घोष के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया था। वहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने 24 अगस्त को जांच अपने हाथ में ली थी।