मथुरा के जवाहर बाग कांड की पुलिस जांच से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को मामले की तत्परता से जांच कर दो माह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। डीजीपी और प्रदेश सरकार से कहा है कि इस मामले से जुड़ी सभी पत्रावलियां सीबीआई को सौंप दी जाएं। इसके अलावा निचली अदालत में चल रही जवाहर बाग कांड के मुकदमे की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है।
जवाहर बाग को अवैध कब्जे से खाली कराने के दौरान दो पुलिस अधिकारियों सहित 28 लोगों की मौत को हाईकोर्ट ने गंभीर मामला मानते हुए कहा है कि पुलिस की जांच में ढेरों खामियां हैं, जिससे किसी भी अभियुक्त को सजा मिलने की उम्मीद नहीं है। इसलिए प्रकरण की सीबीआई जांच जरूरी है।
जवाहर बाग की घटना में पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
अधिवक्ता विजयपाल सिंह तोमर सहित अन्य लोगों की याचिकाओं पर चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद 20 फरवरी को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था। बृहस्पतिवार को अदालत ने सुबह दस बजे ही फैसला सुनाते हुए जांच सीबीआई को करने का आदेश दिया। अपने विस्तृत आदेश में कोर्ट ने सीबीआई को दो टीमें बनाने के लिए कहा है। पहली टीम दो जून 2016 को जवाहर बाग खाली कराने के दौरान हुई घटना की जांच करेगी जबकि दूसरी टीम इस बात की जांच करेगी कि किस प्रकार से दो वर्ष से अधिक समय तक रामवृक्ष यादव और उसके समर्थक जवाहर बाग पर कब्जा जमाए रहे और सरकार मूक दर्शक बन सब कुछ देखती रही।