आगरा की गीता माहोर और उसकी दो बेटियों पर उसके पति ने तेजाब डाला था। एक बच्ची की मौत हो गई। दूसरी बच्ची जिंदा है। बच्ची के साथ जीना बहुत मुश्किल था। एक गैर सरकारी संगठन छांव फाउंडेशन को इस महिला को देखकर शीरोज हैंगआउट कैफे का विचार आया। एनजीओ से मदद मिली और 10 सितंबर, 2014 को शीरोज कैफे सामने आया।
इसमें आज 20 के करीब तेजाब हमले की शिकार महिलाएं काम करती हैं। आगरा, लखनऊ और उदयपुर में चल रहे इन तीनों कैफे के अभियान को राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नारी शक्ति महिला पुरस्कार 2016 से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 8 मार्च को यह पुरस्कार देंगे।
शीरोज हैंगआउट दुनिया में इस तरह का पहला कैफे है, जहां तेजाब हमले की शिकार महिलाओं के चेहरे को ही असली पहचान मिली है। आगरा, लखनऊ और उदयपुर में काम कर रही 20 के करीब महिलाओं के अलावा कई और शिकार युवतियां दूसरे क्षेत्रों में काम करने की टे्रनिंग ले रही है। महिला दिवस के मौके पर महिला बाल विकास मंत्रालय की ओर से 30 के करीब महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा।