Caste Census: पत्र में लिखा गया है कि तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी जातीय जनगणना हुई और इससे वहां के नागरिकों को फायदा मिला है। बिहार की महागठबंधन सरकार में शनिवार से प्रदेश स्तर पर जातीय जनगणना शुरू हो गई है।
बिहार में जातीय जनगणना (Caste Census) शुरू होने के बाद अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मांग उठनी शुरू हो गई है। बता दें कि महाराष्ट्र में भी जातीय जनगणना की मांग उठी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल ने मांग की है कि बिहार की तरह महाराष्ट्र में भी स्वतंत्र जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। जातीय जनगणना की मांग को लेकर भुजबल ने सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। भुजबल ने पत्र में लिखा है कि जातीय जनगणना से अन्य राज्यों को फायदा हुआ है।
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अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले छगन भुजबल ने पत्र में लिखा कि महाराष्ट्र में जाति आधारित जनगणना की मांग लंबे समय से की जा रही है। तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी जातीय जनगणना हुई और इससे वहां के नागरिकों को फायदा मिला है। उन्होंने सर्वेक्षण के आधार पर शुरू की गईं सामाजिक योजनाओं का खास तौर पर अपने पत्र में उल्लेख किया। एनसीपी नेता ने कहा कि समीर भुजबल, गोपीनाथ मुंडे समेत 100 सांसद साल 2010 में ही राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना की मांग का प्रस्ताव लोकसभा में ला चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि 2011 से लेकर 2014 के बीच देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में एक आर्थिक और सामाजिक जनगणना हुई थी लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। भुजबल ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की जनगणना बीते 150 सालों से हो रही है, जिसके बाद इन वर्गों के सामाजिक कल्याण के लिए बजट में विशेष राशि आवंटित की जाती है। छगन भुजबल ने मांग की कि जातियों के सही आंकड़े मिलने जरूरी हैं।
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बिहार की महागठबंधन सरकार में शनिवार से प्रदेश स्तर पर जातीय जनगणना शुरू हो गई है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार का कहना है कि जातीय जनगणना से समाज के सभी वर्गों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद मिलेगी।