केंद्र सरकार ने अब अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के अधिकारियों के लिए भी 'जनरल प्रोविडेंट फंड' यानी 'सामान्य भविष्य निधि' में पैसा जमा कराने की अधिकतम सीमा तय कर दी है। भारत सरकार के लोक शिकायत, कार्मिक और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा छह जनवरी को जारी अपने आदेश में कहा गया है कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी, पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जीपीएफ में जमा नहीं करा सकेंगे। जब तक अखिल भारतीय सेवा 'भविष्य निधि नियम 1955' में संशोधन नहीं होता है, तब तक वहीं नियम लागू होंगे, जिनके तहत केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जीपीएफ में जमा नहीं कराने का आदेश जारी किया गया था। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ के महासचिव सी.श्रीकुमार का कहना है, अगर कोई कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई से कुछ राशि जीपीएफ में जमा कराता है और उस पर ब्याज लेता है, तो वह भी सरकार को सहन नहीं हुआ। सरकार तो केवल अपना खर्च घटाने पर लगी है।
गत वर्ष केंद्रीय कर्मियों पर लागू हुआ था ये नियम
इस संबंध में केंद्र के कई विभागों के नियमों में थोड़ा बहुत अंतर होता है। अखिल भारतीय सेवा 'भविष्य निधि नियम 1955', केंद्र सरकार के सिविल कर्मी, रक्षा विभाग और रेलवे में कुछ नियम अलग होते हैं। हालांकि ये नियम आपस में मिलते-जुलते हैं, लेकिन इनके नियमों का सेट अलग रहता है। डीओपीटी ने कहा है कि जब तक अखिल भारतीय सेवा 'भविष्य निधि नियम 1955' में संशोधन नहीं किया जाता, तब तक इस सेवा के अधिकारियों पर भी वही नियम लागू होंगे, जिनके अंतर्गत केंद्रीय कर्मियों पर जीपीएफ की नई शर्त लागू की गई है। पहली जनवरी से आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और दूसरी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी भी जीपीएफ में पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा नहीं करा सकेंगे। इस बाबत सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा गया है। गत वर्ष केंद्रीय कर्मियों पर पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जीपीएफ में जमा नहीं कराने का नियम लागू किया गया था। उस वक्त आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और दूसरी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को इस दायरे में बाहर रखा गया था।
आरोप, कर्मियों से आर्थिक फायदा छीनने का प्रयास
गत नवंबर में जब यह आदेश जारी किया गया, तब केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने कहा था, अब कोई भी सरकारी कर्मचारी पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जीपीएफ में जमा नहीं करा सकेगा। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार का यह कदम, कर्मियों से आर्थिक फायदा छीनने की कोशिश है। पहले यह नियम था कि कोई भी कर्मचारी, भविष्य निधि में अपने कुल मेहनताने का छह फीसदी जमा कराता था। अनेक ऐसे कर्मचारी भी थे, जो अपने मेहनताने का छह, दस या बीस फीसदी और उससे ज्यादा राशि भी जमा करा देते थे। इस जमा राशि पर जो ब्याज मिलता है, वह सामान्य तौर पर बैंकों के मुकाबले ज्यादा रहता है। मौजूदा समय में जीपीएफ के खाताधारकों को 7.1 फीसदी दर से ब्याज मिलता है। नवंबर में इस बाबत अनेक मंत्रालयों और विभागों से ऐसे सवाल आए थे कि इस नए नियम को किस तरह लागू किया जाए। बहुत से कर्मचारी ऐसे भी थे, जिन्होंने गत वर्ष पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि जीपीएफ में जमा करा दी है।
अब जीपीएफ की अधिकतम राशि तय कर दी गई है
कुछ ऐसे सवाल भी आए थे कि जिन कर्मियों की 2022-23 में जमा राशि पांच लाख रुपये के करीब पहुंचने वाली थी तो उस स्थिति में क्या किया जाए। पेंशन मंत्रालय ने कहा था कि पहले जीपीएफ में कम से कम छह फीसदी राशि जमा कराना अनिवार्य था। यानी जो भी कर्मी जीपीएफ के दायरे में आता है, उसे इतनी राशि तो जमा करानी ही होगी। बहुत से कर्मचारी इससे ज्यादा राशि भी जमा कराते थे। अब जीपीएफ खाते में छह फीसदी राशि जमा कराने वाली शर्त तो रहेगी ही, लेकिन इसकी अधिकतम राशि तय कर दी गई है। अब कोई भी कर्मचारी या अधिकारी किसी भी तरह से पांच लाख रुपये से अधिक की राशि जीपीएफ में जमा नहीं करा सकता। 2022-23 के लिए जिन कर्मियों की राशि पांच लाख रुपये से अधिक हो गई है, उनके खाते पर कैप लगा दी जाए। तब कहा गया था कि अब चालू वित्त वर्ष के लिए उनके जीपीएफ खाते में कोई राशि जमा नहीं होगी। जिन कर्मियों की जमा राशि पांच लाख रुपये होने वाली है, वहां भी ध्यान रखा जाए कि वह पांच लाख के ऊपर न जाने पाए। पुरानी पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत जो भी कर्मी या अधिकारी आते हैं, उन्हें जीपीएफ की सुविधा मिलती है। जीपीएफ पर मिलने वाला ब्याज 80सी के तहत टैक्स के दायरे से बाहर रहता है।