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Tamil Nadu: स्टालिन ने जल्लीकट्टू अखाड़े का किया उद्घाटन, पारंपरिक खेल की अनुमति को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

Wed, 24 Jan 2024 03:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

Tamil Nadu: मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि जल्लीकट्टू को आयोजित करने के लिए मदुरै में भव्य अखाड़े का निर्माण किया है। यह उत्सव तमिलों की संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा, तमिलों की एकता को खत्म करने के लिए जातिगत विभाजन और धार्मिक मतभेद पैदा किए गए थे।
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एमके स्टालिन। - फोटो : अमर उजाला।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को कहा कि तमिल एकता को खत्म करने के लिए जातीय और धार्मिक मतभेद पैदा किए गए थे। उन्होंने लोगों से आग्रह करते हुए कि जल्लीकट्टू जैसे सांस्कृतिक उत्सव मिलजुलकर आयोजित होने चाहिए। जल्लीकट्टू बैलों को काबू करने का एक पारंपरिक खेल है। 
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जल्लीकट्टू अखाड़ा। - फोटो : एक्स/एमके स्टालिन
स्टालिन ने अपने पिता एम करुणानिधि के नाम पर एक भव्य जल्लीकट्टू अखाड़े (स्टेडियम) का उद्घाटन किया। इसके बाद अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इस मामले में फैसला सुनाए जाने से पहले केंद्र सरकार राज्य में खेल आयोजित करने की अनुमति देने को लेकर नाटक कर रही थी। 
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एम करुणानिधि - फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि द्रमुक संस्थापक सीएन अन्नादुरई ने तमिलनाडु को अपना नाम दिया था। जबकि, करुणानिधि ने तमिल के लिए शास्त्रीय भाषा का दर्जा सुनिश्चित किया। तमिलनाडु को पहले मद्रास प्रेसीडेंसी के नाम से जाना जाता था।  

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जल्लीकट्टू अखाड़ा। - फोटो : एक्स/एमके स्टालिन
उन्होंने आगे कहा, द्रविड़ मॉडल सरकार ने 'एरुथाजवुथल' को आयोजित करने के लिए मदुरै में भव्य अखाड़े का निर्माण किया है। यह उत्सव तमिलों की संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा, तमिलों की एकता को खत्म करने के लिए जातिगत विभाजन और धार्मिक मतभेद पैदा किए गए। तमिल पहचान के साथ एकजुट होकर इसे बचाने का प्रयास करें। जल्लीकट्टू को 'एरुथाजवुथल' के नाम से भी जाना जाता है। जिसका अर्थ 'बैलों को गले लगाना' है। 
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जल्लीकट्टू - फोटो : एक्स/एमके स्टालिन
मुख्यमंत्री ने कहा, साल 2014 में जल्लीकट्टू को राज्य में आयोजित नहीं किया जा सका था। उसके तीन साल बाद चेन्नई में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और जल्लीकट्टू को आजोयित करने की मांग की गई थी। जिसके बाद सरकार को घुटने टेकने पड़े थे। उन्होंने तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसा करने का आरोप लगाया।
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जल्लीकट्टू - फोटो : सोशल मीडिया
स्टालिन ने कहा, केंद्र सरकार ने तब जल्लीकट्टू को आयोजित करने की अनुमति देने के नाम पर नाटक किया। भाजपा सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा था कि वह जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ को अनुमति नहीं देगी। बाद में द्रमुक सरकार उच्चतम न्यायालय मं कहा कि जल्लीकट्टू केवल एक मनोरंजन का खेल नहीं है। बल्कि, यह उत्सव किसानों के जीवन और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि उचित सुरक्षा उपायों के साथ इस उत्सव को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल ऐतिहासिक फैसला दिया। 
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