बुधवार को अपने दिल्ली दौरे के दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उसके अगले दिन कांग्रेस छोड़ने की घोषणा कर दी। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अटकलों पर भी फिलहाल विराम लगा दिया। अब पंजाब की राजनीति में अब उनकी भूमिका को लेकर कयास यह लग रहे हैं कि वे अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं।
बताया जा रहा है कि लगभग एक दर्जन कांग्रेस नेता पूर्व सीएम के संपर्क में है। कथित तौर पर, सिंह अपने समर्थकों के साथ एक कार्य योजना तैयार करने के लिए परामर्श कर रहे हैं। उनके राज्य के कुछ किसान नेताओं से भी मिलने की संभावना है। उम्मीद है कि वह एक पखवाड़े के भीतर नई पार्टी बनाएंगे।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि कैप्टन अपनी अलग पार्टी बना लेंगे तो इससे कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचेगा और किसको फायदा होगा? कांग्रेस ने 2017 का पिछला चुनाव अमरिंदर सिंह के चेहरे पर ही लड़ा था। कांग्रेस को यहां 77 सीटें मिली थीं और अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में यहां सरकार बनी थी।
कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचाएंगे अमरिंदर
सेंटर फॉर स्टडी फॉर डेवलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) के निदेशक और राजनीतिक टिप्पणीकार संजय कुमार का मानना है कि यह निश्चित बात है कि जिस तरह अमरिंदर सिंह पार्टी से निकाले गए हैं उनके निशाने पर कांग्रेस ही होगी। लेकिन यह अनुमान लगाना कठिन है यदि वे अलग पार्टी बना लेते हैं तो कांग्रेस को कितनी सीटों पर नुकसान होगा। कैप्टन का पटियाला सीटों पर असर है और हो सकता है कि उनकी पार्टी पांच-छह प्रतिशत वोट ले आए और यह कांग्रेस का ही वोट होगा।
वे कहते हैं, हो सकता है छिटपुट तौर पर उनके कुछ उम्मीदवार जीत भी जाएं लेकिन वे सहानुभूति लहर पर सवार नहीं हो पाएंगे। दरअसल पंजाब के कद्दावर नेता होते हुए भी निश्चित तौर पर पंजाब में उनकी लोकप्रियता में कुछ गिरावट आई है, अब वे पंजाब की राजनीति में उतने असरदार नहीं रह सकते हैं, इस वजह से वे कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नहीं है।