तीन तलाक व समान नागरिक संहिता पर देशभर में मचे बवाल के बीच दारुल उलूम ने इसे दीन धर्म से खिलवाड़ करार दिया। तीन तलाक को धर्म का जरूरी हिस्सा बताते हुए समान नागरिक संहिता को किसी कीमत पर मंजूर करने से इनकार किया और साफ किया इसे लाने के जितने रास्ते होंगे उसे बंद करने की कोशिश की जाएगी। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि इसके लिए पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व में दारुल उलूम सहित सभी जमातें देशभर में अभियान चलाएंगी।
दारुल उलूम के मोहतमिम ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि इस बात पर हम पूरे मुल्क के मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों के दस्तखत इकट्ठा कर रहे हैं। ताकि यह मालूम हो जाए कि जिन्हें इसके लिए खड़ा किया गया है वह एक फीसदी भी नहीं हैं। इस पूरे अभियान में हमारा नेतृत्व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड कर रहा है। नोमानी ने इस पूरे मामले में सरकार को भी आड़े हाथ लिया और इसे सरकार के मेनिफेस्टो का हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक इस्लाम में औरतों के हक की बात है जितना सम्मान इस्लाम धर्म में औरतों को है उतना शायद किसी धर्म में नहीं है। यहां विरासत में हिस्सा दिया जाता है।
धार्मिक चीजों के अलावा किसी को कोई ऐतराज नहीं
एक देश एक कानून पर नोमानी ने कहा कि क्रिमिनल कोर्ट के अंदर देश में एक कानून लागू है और सब उसे मानते हैं। धार्मिक चीजों के अलावा किसी को कोई ऐतराज नहीं है। भारत में बहुत से धर्म और जाति के लोग रहते हैं और हर एक का अपना सिविल कोर्ट है। संविधान में सभी को अपने मजहब को मानने की आजादी दी गई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अंदर निकाह, तलाक, इद्दत, गोद लेने सहित 14 चीजों को रखा गया है। इसके अलावा जितनी चीजे हैं उस पर अदालत फैसला करती है। इसलिए मुसलमान हर हाल में पाबंद है कि वह अपने मजहब की किताब कुरान की पैरवी करें।