कलकत्ता हाई कोर्ट ने लीप्स एंड बाउंड्स के सीईओ के संबंध में जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय से जांच रिपोर्ट मांगी है। ईडी ने लीप्स एंड बाउंड्स के सीईओ पर आरोप लगाया है कि फर्म का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन के लिए किया गया था। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने फर्म के मुख्य परिचालन अधिकारी सुजय कृष्ण भद्र को पहले ही गिरफ्तार किया हुआ है।
बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने मामले में सुनवाई की। इस दौरान याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी मेसर्स लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और वे अप्रैल 2012 से जनवरी 2014 तक कंपनी में निदेशक भी थे।
इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि ईडी ने मंगलवार को जो रिपोर्ट अदालत में दाखिल की है, उसमें जांच एजेंसी ने बताया है कि भद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन इसमें सीईओ के खिलाफ जांच के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई पर जांच एजेंसी को अगली तारीख पर कंपनी के सीईओ के संबंध में जांच को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। बता दें कि फर्म के मुख्य परिचालन अधिकारी सुजय कृष्ण भद्र को शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने नगर पालिका और शिक्षक भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं के संबंध में मामले की कार्यवाही पर सुनवाई के लिए मामले को स्थगित कर दिया। अब इस मामले की सुनवाई 14 सितंबर को होगी।
इस दौरान, न्यायमूर्ति सिन्हा ने ईडी के अलावा सीबीआई को भी निर्देशित किया। अदालत ने कहा कि कथित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीबीआई कथित तौर पर अपेक्षित योग्यता के बिना नियुक्त हुए उम्मीदवारों की एक सूची पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को भेजे। बोर्ड इस सूची को सत्यापित करे। बाद में अदालत इस मामले में कदम उठाएगी।
साथ ही न्यायमूर्ति सिन्हा ने यह भी कहा कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती और नगरपालिका भर्ती घोटालों में कथित रूप से शामिल व्यक्ति लगभग एक ही हैं। ऐसे में दोनों मामलों के संबंध में उचित और संतुलित जांच के लिए जांच दल में समान अधिकारी शामिल होने चाहिए। यह कहते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि सुनील सिंह रावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सीबीआई (एसीबी), कोलकाता को प्राथमिक विद्यालय भर्तियों में अनियमितताओं की जांच करने वाली एसआईटी में शामिल किया जाए।
गौरतलब है कि मामले में पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह रिपोर्ट दाखिल करे कि शिक्षक भर्ती घोटाले में लाभार्थी कौन हैं और अब तक मामले की जांच में क्या-क्या हुआ है?