मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवागनानम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि आरवीएनएल अभी मैदान क्षेत्र में किसी भी पेड़ को नहीं उखाड़ सकता है, न ही पेड़ों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है क्योंकि उचित अधिकारियों से अनुमति प्राप्त करना बाकी है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख कर दावा किया था कि स्टेशन के निर्माण के लिए इलाके में कई पेड़ों को उखाड़ा जा रहा है जिससे शहर की पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है।
एक अवकाशकालीन पीठ ने 26 अक्तूबर के एक अंतरिम आदेश में आरवीएनएल को मैदान क्षेत्र में तब तक पेड़ उखाड़ने से रोक दिया, जब तक आरवीएनएल और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय अपने-अपने हलफनामे दाखिल नहीं कर देते। आरवीएनएल ने इसके विरोध में हलफनामा दायर किया और मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अंतरिम आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य धरोहर आयोग, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सेना के बंगाल क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) को जनहित याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले में राज्य के वन विभाग का भी संज्ञान लिया।
पीठ ने आरवीएनएल को इस मामले में और दस्तावेज संलग्न करते हुए एक पूरक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को कुछ तथ्यों को सामने लाने के लिए पूरक हलफनामा दायर करने की अनुमति दे दी। अदालत ने अधिकारियों को सात दिसंबर तक अपने संबंधित हलफनामे दाखिल करने और याचिकाकर्ता को 15 दिसंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर को होगी।
आवेदन में आरवीएनएल ने कहा कि रक्षा अधिकारियों ने भूमिगत स्टेशन के निर्माण के लिए जमीन और काम करने की अनुमति पहले ही दे दी है। आरवीएनएल ने यह भी बताया कि निर्माण क्षेत्र में गिरने वाले पेड़ों के प्रत्यारोपण की अनुमति देने के लिए रक्षा अधिकारियों को एक आवेदन भी भेजा गया है। यह कहा गया था कि एक बार रक्षा अधिकारी पेड़ों के प्रत्यारोपण के लिए अपनी मंजूरी दे देते हैं, तो वन अधिकारियों से अनुमति मांगी जाएगी।
आरवीएनएल के वकील ने कहा कि प्रस्तावित विक्टोरिया मेट्रो स्टेशन के लिए केवल जमीन की घेराबंदी की गई है और एनओसी देने से पहले निर्माण का कोई सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने आरवीएनएल के वकील की इस दलील पर गौर किया कि वह मैदान क्षेत्र में किसी भी पेड़ को उखाड़ने की स्थिति में नहीं है क्योंकि आवश्यक अनुमति अभी तक नहीं ली गई है।