असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार को दावा किया कि असम के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पूरी तरह निरर्थक है और राज्य से भारत की नागरिकता के लिए सबसे कम संख्या में आवेदन आएंगे। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों को सहूलियत देते हुए एक पोर्टल लॉन्च किया था।
इस पर असम सीएम ने कहा, ‘‘सीएए असम में पूरी तरह निरर्थक है और पोर्टल में राज्य से सबसे कम संख्या में आवेदन होंगे।’’ उन्होंने कहा कि अधिनियम में बिल्कुल स्पष्ट है कि नागरिकता के लिए आवेदन तभी दिया जा सकता है, जब कोई 31 दिसंबर 2014 से पहले देश में आया हो और असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) के तैयार होने के बाद जिन लोगों को इसमें अपने नाम नहीं मिले हैं और जिन्होंने आवेदन किया था। केवल ऐसे लोग ही सीएए के लिए आवेदन देंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम में 14 लोकसभा सीट में से 13 पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में आएंगे।
असम डीजीपी ने प्रदर्शनकारियों से की ये अपील
दूसरी तरफ असम के डीजीपी जीपी सिंह ने लोगों से अपील की कि वे सड़कों पर हिंसा के बजाय शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से मुद्दों को हल करें। गौरतलब है कि राज्य में अलग-अलग संगठन नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के छात्र संघों की शीर्ष संस्था नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) ने बुधवार को पूरे क्षेत्र में सीएए के नियमों की प्रतियां जलाईं और कानून को तत्काल रद्द करने की मांग की। वहीं ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने भी दिन में सभी जिला मुख्यालयों में सत्याग्रह किया।
डीजीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘31 जनवरी 2023 से असम सरकार द्वारा प्रतिष्ठित असम पुलिस का नेतृत्व करने का अवसर दिए जाने के बाद, मैं प्रत्येक पुलिसकर्मी के सभी प्रमाणिक कार्यों के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह हूं।’’ उन्होंने कहा,‘‘मजबूत नेतृत्व में टीम असम के लोगों को शांतिपूर्ण माहौल में रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’’