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सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-4 वाहनों की बिक्री पर लगाई रोक, जानिए क्या होते हैं भारत स्टेज उत्सर्जन मानक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 24 Oct 2018 11:14 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

लोगों के स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 1 अप्रैल 2020 से देशभर में बीएस- 4 उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की न तो बिक्री होगी और न ही पंजीकरण। 1 अप्रैल, 2020 से सिर्फ बीएस-छह उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की ही बिक्री होगी।  पर्यावरण के साथ किसी तरह का समझौता करने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि स्वच्छ ईंधन समय की मांग है। इसमें एक दिन की भी देरी सही नहीं है।

जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वाहन निर्माताओं को बीएस-चार वाहनों की बिक्री के लिए और वक्त देने की मांग को ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि बीएस-चार से बीएस-छह में शिफ्ट होने के लिए करीब डेढ़ वर्ष का वक्त है, जो पर्याप्त है। पीठ ने गौर किया कि सरकार बीएस-छह के लिए अब तक 30 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। दिल्ली में गत 1 अप्रैल से ही दिल्ली में यह ईंधन उपलब्ध है। पीठ ने कहा कि बीएस-छह ईंधन आने से पीएम-2.5 में करीब 68 फीसदी सुधार होगा। 



पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि स्वस्थ वातावरण में रहना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जीने के अधिकार (संविधान के अनुच्छेद-21) में निहित हैं। धुएं और प्रदूषण रहित वातावरण में रहना नागरिकों का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम ऐसी हालात में रह रहे हैं जहां प्रदूषण का असर गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी पड़ रहा है। पीठ ने वाहन निर्माताओं की उस दलील को खारिज कर दिया है  जिसमें कहा गया था कि बीएस-छह मानक वाले वाहनों की कीमत बढ़ जाएगी। इससे वाहनों की बिक्री कम होगी।  पीठ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के उस आंकड़े पर भी गौर किया जिसमें विश्व के 4300 प्रदूषित शहरों में ग्वालियर, इलाहाबाद, रायपुर, दिल्ली, लुधियाना, वाराणसी व पटना को शामिल किया गया था।

क्या है बीएस के आगे लिखी संख्या का अर्थ

अक्सर आप सुनते होंगे बीएस-2 वाहन, बीएस-3 वाहन और बीएस-4 वाहन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन संख्याओं का मतलब क्या है? बीएस के आगे संख्या के बढ़ते जाने का मतलब है उत्सर्जन के बेहतर मानक, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं। भारत में गाड़ियों के प्रदूषण को मापने के लिए बीएस का इस्तेमाल किया जाता है।

बीएस के आगे जितना बड़ा नंबर लिखा होता है उस गाड़ी से उतने ही कम प्रदूषण होने की संभावना होती है। ये बीएस मानक देश का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। साथ ही देश में चलने वाली हर गाड़ी के लिए यह आवश्यक होता है कि वह इन सभी मानकों पर खरी उतरे।

अब देश में बीएस-6 पर भी चर्चा हो रही है। भारत में शुरुआत हुई थी बीएस-2 से। इसके बाद बीएस-4 का इस्तेमाल किया जाने लगा। जब बीएस-4 इंजन का प्रयोग शुरू हुआ, तब कहा गया था कि बीएस-3 मानक के मुकाबले बीएस-4 मानक वाले इंजन उत्सर्जन में भारी कमी लाएंगे। यानी ये माना गया था कि बीएस-3 मानक वाले इंजन के मुकाबले बीएस-4 वाले इंजनों का इस्तेमाल सुरक्षित है।

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उत्सर्जन मानक लेकिन अब इनकी बिक्री भी एक अप्रैल 2020 के बाद से नहीं हो सकेगी। न ही इस इस मानक के वाहन पंजीकृत होंगे। इसके पीछे का कारण है कि भारत सरकार ने बीएस-5 मानक को पीछे छोड़ते हुए साल 2020 तक बीएस-6 स्टैंडर्ड लागू करने का फैसला किया है। ताकि प्रदूषण को और कम किया जा सके।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
लोगों के स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 1 अप्रैल 2020 से देशभर में बीएस- 4 उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की न तो बिक्री होगी और न ही पंजीकरण। 1 अप्रैल, 2020 से सिर्फ बीएस-छह उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की ही बिक्री होगी।  पर्यावरण के साथ किसी तरह का समझौता करने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि स्वच्छ ईंधन समय की मांग है। इसमें एक दिन की भी देरी सही नहीं है।

जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वाहन निर्माताओं को बीएस-चार वाहनों की बिक्री के लिए और वक्त देने की मांग को ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि बीएस-चार से बीएस-छह में शिफ्ट होने के लिए करीब डेढ़ वर्ष का वक्त है, जो पर्याप्त है। पीठ ने गौर किया कि सरकार बीएस-छह के लिए अब तक 30 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। दिल्ली में गत 1 अप्रैल से ही दिल्ली में यह ईंधन उपलब्ध है। पीठ ने कहा कि बीएस-छह ईंधन आने से पीएम-2.5 में करीब 68 फीसदी सुधार होगा। 

पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि स्वस्थ वातावरण में रहना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जीने के अधिकार (संविधान के अनुच्छेद-21) में निहित हैं। धुएं और प्रदूषण रहित वातावरण में रहना नागरिकों का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम ऐसी हालात में रह रहे हैं जहां प्रदूषण का असर गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी पड़ रहा है। पीठ ने वाहन निर्माताओं की उस दलील को खारिज कर दिया है  जिसमें कहा गया था कि बीएस-छह मानक वाले वाहनों की कीमत बढ़ जाएगी। इससे वाहनों की बिक्री कम होगी।  पीठ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के उस आंकड़े पर भी गौर किया जिसमें विश्व के 4300 प्रदूषित शहरों में ग्वालियर, इलाहाबाद, रायपुर, दिल्ली, लुधियाना, वाराणसी व पटना को शामिल किया गया था।
क्या है बीएस के आगे लिखी संख्या का अर्थ

अक्सर आप सुनते होंगे बीएस-2 वाहन, बीएस-3 वाहन और बीएस-4 वाहन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन संख्याओं का मतलब क्या है? बीएस के आगे संख्या के बढ़ते जाने का मतलब है उत्सर्जन के बेहतर मानक, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं। भारत में गाड़ियों के प्रदूषण को मापने के लिए बीएस का इस्तेमाल किया जाता है।

बीएस के आगे जितना बड़ा नंबर लिखा होता है उस गाड़ी से उतने ही कम प्रदूषण होने की संभावना होती है। ये बीएस मानक देश का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। साथ ही देश में चलने वाली हर गाड़ी के लिए यह आवश्यक होता है कि वह इन सभी मानकों पर खरी उतरे।

अब देश में बीएस-6 पर भी चर्चा हो रही है। भारत में शुरुआत हुई थी बीएस-2 से। इसके बाद बीएस-4 का इस्तेमाल किया जाने लगा। जब बीएस-4 इंजन का प्रयोग शुरू हुआ, तब कहा गया था कि बीएस-3 मानक के मुकाबले बीएस-4 मानक वाले इंजन उत्सर्जन में भारी कमी लाएंगे। यानी ये माना गया था कि बीएस-3 मानक वाले इंजन के मुकाबले बीएस-4 वाले इंजनों का इस्तेमाल सुरक्षित है।

उत्सर्जन मानक लेकिन अब इनकी बिक्री भी एक अप्रैल 2020 के बाद से नहीं हो सकेगी। न ही इस इस मानक के वाहन पंजीकृत होंगे। इसके पीछे का कारण है कि भारत सरकार ने बीएस-5 मानक को पीछे छोड़ते हुए साल 2020 तक बीएस-6 स्टैंडर्ड लागू करने का फैसला किया है। ताकि प्रदूषण को और कम किया जा सके।

उत्सर्जन मानक क्या होता है?

गाड़ियों के फ्यूल से निकलने वाले पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए मानदंड तय किए जाते हैं जिन्हें उत्सर्जन मानक कहा जाता है और सभी ऑटोमोबाइल कंपनियो को इन मानकों का पालन भी करना होता है ताकि वायु प्रदूषण कंट्रोल किया जा सके। गाड़ियों का उत्पादन करते समय, इंजन में एक इंटरनल एक्युपमेंट का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि प्रदूषण कम से कम हो। भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से एमिशन नॉर्म्स की जांच और तय समय-सीमा के अंदर इसे पूरी तरह से लागू करने का काम किया जाता है।

भारत स्टेज उत्सर्जन मानक कब और कहां:
देश में भारत स्टेज उत्सर्जन मानक को 4 स्टेज में बांटा गया है जिसे अलग-अलग तरीके से पूरे देशभर में लागू किया जाना है। इसमें टू-व्हीएलर से लेकर हेवी कमर्शियल व्हिकल शामिल हैं।

आइए आपको एक-एक करके बताते हैं इन मानकों के बारे में

भारत स्टेज-2
भारत स्टेज-2 को यूरो-2 भी कहते है। 4 व्हीहलर्स गाड़ियों के लिए इसे वर्ष 2001 तक दिल्ली एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में लागू किया गया था, जबकि वर्ष 2003-2004 में इसे एसीआर समेत 13 अन्य शहरों में भी लागू किया गया। इसके बाद वर्ष 2004-2005 में पूरे देश में इसे लागू किया गया था। वहीं 01 अप्रैल 2005 तक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए इन नॉर्म्स को पूरे देश में लागू किया गया।

भारत स्टेज-3
भारत स्टेज-3 या यूरो-3, इस उत्सर्जन मानक के तहत 4-व्हीलर्स गाड़ियों के लिए इसे साल वर्ष 2004-2005 में एनसीआर व 13 अन्य शहरों में भी लागू किया गया था। वहीं साल 2010 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2010 तक सभी टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर के लिए भी इसे लागू किया गया।

भारत स्टेज-4
भारत स्टेज-4 को यूरो-4 भी कहा जाता है। इस उत्सर्जन मानक के अंतर्गत 4-व्हीलर्स गाड़ियों के लिए वर्ष 2010 में इसे NCR सहित 13 अन्य शहरों में भी लागू किया गया था। जबकि वर्ष 2012 में इसे सभी टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर में लागू किया गया।

भारत स्टेज-5
अब बात करते है भारत स्टेज-5 या यूरो-5 के बारे में, इस उत्सर्जन मानक के तहत सभी टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और 4-व्हीलर्स गाड़ियां शामिल की गयी हैं। और इसे साल 2017 में पूरे देश में लागू किया जाने का प्रस्ताव है।
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