तेलंगाना में सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल बीआरएस में जुबानी जंग अब अलग रूप लेने लगी है। दरअसल बीआरएस नेता की तरफ से बागी नेताओं को चूड़ी और साड़ी भेजने की बात करने पर कांग्रेस की तरफ से जूता दिखाकर पलटवार किया गया है।
तेलंगाना में हाल ही में 10 बीआरएस नेता सत्ताधारी दल कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इस पर बीआरएस विधायक पी कौशिक रेड्डी ने बागी नेताओं को साड़ी और चूड़ी भेंट करने की बात कही है। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी की महिला नेता की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया आयी है और उन्होंने कहा कि अपनी अपमानजनक टिप्पणियों से महिलाओं का अपमान किया है। इस दौरान उन्होंने उनसे जल्द माफी मांगने की मांग की है।
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कांग्रेस नेता ने जूता दिखाकर किया पलटवार
दरअसल बीआरएस विधायक पी कौशिक रेड्डी की तरफ कांग्रेस में शामिल हुए 10 पार्टी विधायकों को साड़ी और चूड़ियां भेजने की पेशकश पर कांग्रेस नेता और तेलंगाना राज्य महिला सहकारी विकास निगम की अध्यक्ष बी. शोभा रानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना जूता निकाला और बीआरएस विधायक को उनकी टिप्पणियों के लिए चेतावनी दी।
कौशिक रेड्डी ने साड़ी और चूड़ियां की कही थी बात
बता दें कि हुजूराबाद विधानसभा क्षेत्र से बीआरएस विधायक पी कौशिक रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि वह कांग्रेस में शामिल हुए 10 बीआरएस विधायकों को उपहार-साड़ी और चूड़ियां भेजना चाहते हैं और उनसे इसे पहनने के लिए कहा है। कौशिक रेड्डी ने यह भी कहा कि वह कूरियर के जरिए बीआरएस विधायकों के घरों पर साड़ी और चूड़ियां भेजेंगे।
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राज्य महिला आयोग से भी की शिकायत
उनकी इस टिप्पणी से नाराज कांग्रेस महिला नेताओं ने उनसे कहा कि वे पहले बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव को ये सामान भेजें और कहा कि उन्होंने दलबदल शुरू किया था। उन्होंने तेलंगाना राज्य महिला आयोग से कौशिक रेड्डी की टिप्पणियों का संज्ञान लेने का भी आग्रह किया।
तीन विधायकों के अयोग्यता की मांग
बीआरएस विधायक केपी विवेकानंद और कौशिक रेड्डी ने बुधवार को राज्य विधानसभा सचिव से मुलाकात की और उनसे सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हुए पार्टी के तीन विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं को स्पीकर के समक्ष रखने के लिए कहा, ताकि तेलंगाना उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार याचिकाओं पर सुनवाई के लिए समय तय किया जा सके। बता दें कि राज्य में 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद 10 बीआरएस विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और कई बीआरएस एमएलसी भी सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए हैं, जिसमें राष्ट्रीय पार्टी सत्ता में आई और बीआरएस का एक दशक पुराना शासन खत्म हो गया।