जेल में बृजेश सिंह और अमर मणि त्रिपाठी
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पूर्वांचल में एमएलसी सीटों के लिए हुए चुनाव में सपा ने बाजी मारी है। रविवार को मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए गए। इसमें मिर्जापुर-सोनभद्र, आजमगढ़-मऊ और बलिया सीट पर सपा प्रत्याशी को जीत मिली तो वाराणसी सीट पर निर्दल प्रत्याशी बृजेश सिंह को कामयाबी मिली। गाजीपुर में भी निर्दल प्रत्याशी और जौनपुर में बसपा उम्मीदवार को विजय मिली।
वाराणसी सीट पर निर्दल प्रत्याशी बृजेश सिंह ने एकतरफा जीत दर्ज की। बृजेश ने सपा की अधिकृत उम्मीदवार मीना सिंह मनोज को 1954 मतों से शिकस्त दी।
इस तरह बृजेश ने जेल में रहते हुए विधान परिषद का सफ र तय किया। जीत की खुशी में उनके समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और ढोल-नगाड़े पर जमकर नाचे। बृजेश को कुल 3038 वोट जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा की मीना सिंह को 1084 वोट मिले। मिर्जापुर-सोनभद्र सीट पर सपा की रामलली मिश्रा ने 222 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। रामलली मिश्रा को 1655 और उनके प्रतिद्वंद्वी बसपा के त्रिभुवन नारायण सिंह को 1433 मत मिले। पूर्व एमएलसी विनीत सिंह ने मतगणना में धांधली की शिकायत करते हुए पुनर्मतगणना की मांग की।
आजमगढ़-मऊ सीट पर सपा प्रत्याशी राकेश कुमार यादव ने भाजपा के राजेश सिंह महुआरी को 1978 मतों से हराकर जीत हासिल की। सपा के राकेश कुमार कुमार यादव को 2966, भाजपा के राजेश सिंह महुआरी को 998 वोट मिले। बलिया सीट पर सपा के रविशंकर सिंह पप्पू विजयी घोषित किए गए। सपा प्रत्याशी को 2093 और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के ठाकुर अनूप सिंह को 52 वोट मिले।
गाजीपुर सीट पर निर्दल प्रत्याशी विशाल सिंह चंचल ने सपा प्रत्याशी डॉ. सानंद सिंह को 65 मतों से पराजित कर निर्वाचित घोषित किए गए। चंचल को 1186 जबकि डॉ. सिंह को 1121 मत मिले। जौनपुर सीट पर बसपा के बृजेश सिंह प्रिंसू 1743 मत पाकर निर्वाचित घोषित किए गए। उन्होंने सपा प्रत्याशी लल्लन यादव को करारी शिकस्त दी। लल्लन को 978 मत मिले।
सत्ता की हनक के साथ वोट बैंक का समीकरण भी हुआ ध्वस्त
बृजेश सिंह
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स्थानीय प्राधिकारी एमएलसी चुनाव में निर्दल प्रत्याशी बृजेश सिंह की जीत के साथ ही समाजवादी पार्टी का चुनाव प्रबंधन और सत्ता की हनक दोनों ध्वस्त हो गए। सपा के अंदरखाने में ही पार्टी के चुनाव प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी के पदाधिकारी तीनों जिलों में ठीक से आपसी समन्वय तक नहीं बना पाए। चंदौली, वाराणसी और भदोही में स्थानीय रणनीतिकार भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए। सत्ता की हनक के बावजूद वे ‘कपसेठी हाउस’ के चुनाव प्रबंधन का कोई तोड़ नहीं निकाल पाए।
सपा ने इस सीट पर पहले दागी अमीर चंद्र पटेल को प्रत्याशी बनाया था। बाद में जब हो-हल्ला हुआ तो फिर बृजेश सिंह को 2012 के विधानसभा चुनाव में सैयदराजा सीट से हराने वाले मनोज सिंह डब्ल्यू की बहन मीना सिंह को टिकट दे दिया गया। आखिरी वक्त में टिकट में हुए बदलाव का भी असर पड़ा। सपा के चुनावी रणनीतिकारों की मानें तो मनोज सिंह डब्ल्यू के बढ़ते कद को पार्टी के ही कई दिग्गज बरदाश्त नहीं कर पाए। जो एकजुट प्रयास होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। भीतरघात का ही नतीजा आज सामने है।
उधर, कपसेठी हाउस के रणनीतिकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही बृजेश के लिए एमएलसी चुनाव में उतरने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। काफी पहले ही उन्होंने अपनी दावेदारी भी पेश कर दी थी। बृजेश की पत्नी और निवर्तमान एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह के सकारात्मक कामकाज का भी अच्छा प्रभाव पड़ा। तीनों जिलों में व्यापक जनसंपर्क किया गया था। उसी का नतीजा रहा कि जनप्रतिनिधियों से लंबे समय के व्यवहार को वोट में बदलने में कामयाबी मिली।