इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की नकदी बरामदगी मामले में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन (बीएलए) ने सीजेआई बीआर गवई को पत्र लिखकर न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। बीएलए ने मुकदमा चलाने की अनुमति के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों का हवाला दिया।
बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई को पत्र लिखा है। वकीलों के संगठन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। गौरतलब है कि न्यायाधीश वर्मा के दिल्ली में रहने के दौरान उनके सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी। इस विवाद के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया।
विज्ञापन
पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र के साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की रिपोर्ट की कॉपी भी भेजी थी, जिसमें न्यायाधीश वर्मा को दोषी ठहराया गया था। इसके अलावा, पूर्व सीजेआई ने उनके साथ न्यायाधीश वर्मा का जवाब भी साझा किया था।
BLA ने जनहित याचिका को खारिज करने का भी जिक्र किया
बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन (बीएलए) ने दो जून को लिखे अपने पत्र में अध्यक्ष अहमद एम आब्दी और सचिव एकनाथ आर ढोकले के हस्ताक्षर के साथ न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 21 मई को इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका को खारिज करने का भी जिक्र किया, जिसमें एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'समय से पहले' दाखिल याचिका बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह पहले उचित अधिकारियों से संपर्क करें।
मुकदमा शुरू करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मांगी मंजूरी
वकीलों के संगठन ने कहा कि मुकदमेबाज और अन्य आम लोग भी कानूनी प्रक्रिया में सक्रिय हितधारक हैं। उन्होंने बताया कि आवेदक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू करने के लिए मंजूरी चाहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने न्यायाधीश के आधिकारिक आवास से कथित रूप से बेहिसाब नकदी बरामद होने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति की भी मांग की।
1991 के वीरस्वामी मामले का दिया हवाला
बीएलए ने पत्र में 1991 के वीरस्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश की पूर्व मंजूरी के बिना हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। पत्र में न्यायाधीश पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने के अलावा, दिल्ली पुलिस या सीबीआई सहित अधिकारियों को आंशिक रूप से जले हुए नोट, तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग सहित सभी प्रासंगिक साक्ष्यों को संरक्षित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।