अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर के मुद्दे पर कई जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सोमवार को मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अनाधिकृत होर्डिंग, बैनर और पोस्टर बार-बार आने वाली समस्या है। साथ ही अदालत ने यह भी पूछा कि इस समस्या को खत्म करने के लिए सरकार क्या उठा रही है? इस मामले में अगली सुनवाई के लिए पीठ ने 13 अक्टूबर की तारीख तय की है।
गौरतलब है कि बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ राज्य भर में सार्वजनिक दीवारों और सड़कों को खराब करने वाले अनाधिकृत और अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर के मुद्दे पर जनहित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता (एजी) आशुतोष कुंभकोनी ने खंडपीठ को बताया कि पिछले महीने राज्य भर में एक विशेष अभियान चला कर कई अवैध होर्डिंग हटाए गए थे। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सरकार ने दिशा-निर्देश और नियम जारी किए हैं। साथ ही पुलिस अधिकारियों और नगरपालिका अधिकारी भी इस मुद्दे पर संवेदनशील हैं। इस पर न्यायमूर्ति कार्णिक ने कहा कि दक्षिण मुंबई में मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास के बाहर पिछले सप्ताह एक बड़ा होर्डिंग लगाया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि ये सभी विशेष अभियान ठीक हैं, लेकिन आप इन अवैध होर्डिंग्स को बार-बार आने से कैसे रोकते हैं।
इस पर महाधिवक्ता कुंभकोनी ने सीजे के आवास के बाहर होर्डिंग के लिए माफी मांगते हुए कहा कि इसके लिए निरंतर निगरानी की जरूरत है। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता कुंभकोनी ने राज्य सरकार की एक रिपोर्ट भी अदालत को सौंपी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई को छोड़कर राज्य के सभी नगर निगमों में तीन से चार अगस्त को एक विशेष अभियान चलाकर 27,206 होर्डिंग हटाए गए थे। इतना ही नहीं इस अभियान में 7.23 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल किया गया था। इसके अलावा जिला परिषदों में 686 होर्डिंग हटाकर 38 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया था। वहीं, मुंबई में यह विशेष अभियान 10 दिनों तक 3 अगस्त से 13 अगस्त तक चलाया गया था। इस दौरान मुंबई में 1,693 होर्डिंग हटाए गए और 168 प्राथमिकी दर्ज की गईं थी।
वहीं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश अधिवक्ता मनोज शिरसत ने होर्डिंग या बैनर पर क्यूआर कोड लगाने का सुझाव दिया, जिसे स्कैन करके यह पता लगाया जा सके कि क्या इसके लिए अनुमति दी गई है। उनके इस सुझाव पर अदालत ने एजी कुंभकोनी से इस पर विचार करने को कहा है।