पुलिस स्टेशनों में केस डायरी रखने के तरीकों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस मुद्दे पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। 16 जनवरी के अपने आदेश में खंडपीठ ने कहा कि नियमित रूप से ऐसे मामले देखने को मिलते हैं, जहां कानून के मुताबिक पुलिस द्वारा केस डायरी का रखरखाव नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी और उसके माता-पिता पर आरोप लगाया कि वह बच्ची को लेकर गायब हो गए हैं। अदालत को बताया गया कि महिला, उसके माता-पिता और बच्चे को पंजाब के अमृतसर से पकड़ा था। याचिकाकर्ता की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया, हालांकि जमानत पर रिहा कर दिया है। पीठ ने केस डायरी सहित पुलिस जांच दस्तावेजों का अवलोकन किया।
केस डायरी की पूरी तरह अवेहलना- कोर्ट
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि केस डायरी की पूरी तरह से अवेहलना में रखी गई थी, जिसमें कहा गया था कि जांच में कार्यवाही की हर दिन की एंट्री वाली डायरी को विधिवत रुप से किया जाना चाहिए। इसमें आगे कहा गया कि उच्च न्यायालय द्वारा कई आदेश पारित किए गए और महाराष्ट्र के डीजीपी द्वारा परिपत्र जारी किए गए, जिसमें जांच अधिकारियों को कानून के मुताबिक सभी मामलों में केस डायरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
ऐसे निर्देश देने पर हो रही परेशानी- कोर्ट
अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि डीजीपी द्वारा जारी निर्देश निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों तक नहीं पहुंचे हैं, जो जमीनी स्तर पर जांच कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि उसे इस तरह के निर्देश जारी करने में परेशानी हो रही है, लेकिन उसे नियमित रूप से ऐसे उल्लंघनों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि डीजीपी सभी पुलिस अधिकारियों से राज्य में सर्वोच्च पुलिस प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने में गंभीरता बरतेंगे और ऐसे निर्देशों को पर लापरवाही नहीं बरतेंगे।