मृतक बेटे का वीर्य क्यों चाहती है मां, क्लिनिक ने देने से क्यों इनकार किया
अदालत पहुंची इस मां की दलील है कि फर्टिलिटी क्लिनिक ने उसके बेटे का वीर्य देने से इनकार कर दिया। क्लिनिक ने कहा है कि वीर्य संरक्षित कराते समय युवक ने कहा था कि उसकी मौत के बाद वीर्य-शुक्राणुओं को नष्ट कर दिया जाए। इस संबंध में उसने सहमति पत्र पर साइन भी किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर पीड़ित इस युवक ने अपने इलाज और कीमोथेरेपी सेशन के दौरान वीर्य को फ्रीज कराकर संरक्षित रखने का फैसला लिया था।
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30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति मनीष पिताले की पीठ ने 25 जून को आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि अगर मृतक के फ्रोजन सीमेन को याचिका पर सुनवाई पूरी होने से पहले ही नष्ट कर दिया जाएगा तो याचिका बेमानी हो जाएगी। इसलिए सुनवाई पूरी होने तक सीमेन को संरक्षित रखा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
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महिला ने नए कानून के प्रावधानों के तहत अपील की, क्या हैं नए नियम?
बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली मां का कहना है कि प्रजनन केंद्र (फर्टिलिटी) ने उसकी मांग पूरी करने से इनकार करते हुए नए कानून के तहत अदालत में अपील दायर करने को कहा। नए कानून में सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) क्लीनिकों के विनियमन और पर्यवेक्षण का प्रावधान किया गया है। इस कानून का मकसद नैतिक प्रथाओं को सुनिश्चित करना, दुरुपयोग को रोकना और एआरटी सेवाओं की मांग करने वाले व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।
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