सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाया ऑनलाइन पोर्टल: महाराष्ट्र सरकार
अदालत ने कंठारिया से पूछा कि क्या राज्य सरकार यह बयान देने के लिए तैयार है कि किसी आवेदन को महज इस आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा कि वह भौतिक रूप से दायर किया गया है। हालांकि, कंठारिया ने कहा कि ऑनलाइन पोर्टल का निर्माण महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किया है। इसका उद्देश्य आवेदकों को लाभ पहुंचाना है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ऐसे सभी लोगों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है जो आवेदन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था को समझ नहीं पा रहे हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करने में किसी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, याचिकाकर्ता की वकील सुमेधा राव ने हाईकोर्ट को बताया कि अनुग्रह राशि के लिए कई दावे गरीब लोगों की ओर से किए गए हैं जिन्हें दावा करने के बारे में जानकारी नहीं है और जो ऑनलाइन तरीके के बारे में नहीं जानते हैं। राव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि अनुग्रह राशि का भुगतान आवेदन के 30 दिन के अंदर हो जाना चाहिए। पिछले साल अक्तूबर और नवंबर के बीच पूरे महाराष्ट्र में लगभग 50 लोगों ने भौतिक रूप से आवेदन किया था। उन्होंने आगे कहा कि जब ये आवेदन दाखिल किए गए थे उस समय ऑनलाइन पोर्टल शुरू नहीं हुआ था। अदालत मामले की सुनवाई अब 14 फरवरी को करेगी।