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Punjab: चुनाव के मुहाने पर 'पंजाब' में ब्लास्ट अच्छा संकेत नहीं, खालिस्तान पर खतरनाक है 'जनरल बाजवा' का प्लान

सार

केंद्रीय जांच एजेंसी के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना के जनरल बाजवा और आईएसआई चीफ नदीम अंजुम, खालिस्तान के मुद्दे पर आगे बढ़ रहे हैं। मौजूदा दौर में पंजाब का चुनाव, जिस तरह के संकेत दे रहा है, उससे भारतीय खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ी है। बेअदबी की दो घटनाएं, ये सामान्य मामला नहीं है।
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पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने लुधियाना ज़िला न्यायालय में हुए विस्फोट में घायल लोगों से अस्पताल में जाकर मुलाक़ात की। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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चुनाव के मुहाने पर खड़े पंजाब में कुछ अप्रत्याशित सा होने लगा है। पिछले सप्ताह अचानक बेदअबी के दो मामले सामने आ गए। इससे पहले कि प्रदेश में बवाल मचता, सरकार ने इस मामले को किसी तरह से संभाल लिया। हालांकि अभी वह चिंगारी बुझी नहीं है और आज वीरवार को लुधियाना के अदालत परिसर में विस्फोट हो गया, जिसमें दो लोग मारे गए। कुछ लोग घायल भी हुए हैं। चुनाव के मुहाने पर 'पंजाब' में ब्लास्ट अच्छा संकेत नहीं है। सीमावर्ती राज्य पंजाब में खालिस्तान को लेकर 'जनरल बाजवा' का प्लान बहुत खतरनाक है। 

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पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा, चुनाव की दहलीज पर खालिस्तान को दोबारा से जीवित करने में लगे हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इस तरह के इनपुट मिल रहे हैं कि राज्य में खालिस्तान आंदोलन को बड़े स्तर पर हवा दी जा रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों की बयानबाजी और सीटों को लेकर हो रही मारामारी जनरल 'बाजवा' को मौका दे सकती है।

केंद्रीय जांच एजेंसी के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना के जनरल बाजवा और आईएसआई चीफ नदीम अंजुम, खालिस्तान के मुद्दे पर आगे बढ़ रहे हैं। मौजूदा दौर में पंजाब का चुनाव, जिस तरह के संकेत दे रहा है, उससे भारतीय खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ी है। बेअदबी की दो घटनाएं, ये सामान्य मामला नहीं है। इन मामलों को लेकर प्रदेश के सियासतदान एक दूसरे पर हमलावर हैं, उसका फायदा पड़ोसी मुल्क उठा रहा है। अब लुधियाना के अदालत परिसर में विस्फोट हो जाता है। एनआईए जैसी जाँच एजेंसियां, आईएसआई और खालिस्तान के नेटवर्क को तोड़ने में लगी हैं। 
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सूत्रों का कहना है कि विदेशों में बैठकर पाकिस्तान के हाथों में खेल रहे खालिस्तानी आंदोलन के समर्थकों को कानूनी दायरे में लेने के लिए एनआईए की टीम कनाडा गई थी। सिख फॉर जस्टिस, जैसे खालिस्तानी संगठन द्वारा पंजाब के युवाओं को गलत मंशा से आर्थिक मदद दी जा रही है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान टाइगर फोर्स और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स जैसे कई दूसरे संगठन भी सक्रिय हैं। ये सभी संगठन विदेशों में रह कर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। 
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले दिनों कनाडा के रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर के खिलाफ भारत में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के चलते आरोप पत्र दायर किया है। निज्जर, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) का सदस्य रहा है। एमटीएसएस सेवाओं और हवाला चैनलों के जरिए वह भारत में अपने गुर्गों को पैसा भेजता था। उसने पाकिस्तान में अपने सहयोगियों से हथियारों और गोला-बारूद प्राप्त करने की कोशिश की थी। 

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पंजाब में जिस तरह से राजनीतिक दल आपस में उलझे हैं, उससे आईएसआई और खालिस्तान समर्थकों की राह आसान हो गई है। ये दोनों संगठन, पंजाब चुनाव में बड़ा बवाल करा सकते हैं। इसमें दो समुदायों के बीच हिंसा कराना भी शामिल है। बेअदबी की घटना को इसी साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। पंजाब में ड्रग्स केस के आरोपी अकाली नेता बिक्रम मजीठिया के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। यह मामला भी सामान्य नहीं है। इसके पीछे की कहानी लंबी है। खैर, अभी बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी बाकी है। संभव है कि जब पुलिस के हाथ उसके गिरेबान तक पहुंचें तो प्रदेश में तोड़फोड़ हो जाए। ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। 

भारतीय एजेंसियों को जो अलर्ट मिले हैं, उसमें विस्फोट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और नेताओं पर हमला, आदि शामिल हैं। खास बात ये है कि पाकिस्तानी आईएसआई इन सब घटनाओं को अंजाम देने के लिए अपने आतंकी संगठनों का इस्तेमाल नहीं कर रही है। आईएसआई, खालिस्तानी संगठनों में नए युवाओं की भर्ती कर अपने मंसूबों को अंजाम देने की तैयारी में है। इसके लिए उसे चुनाव की मारामारी से बेहतर कुछ नजर नहीं आता। 

चुनावी माहौल में किसी भी वारदात को अंजाम देकर आईएसआई, साफ बच निकल सकती है। उसके पास दो बातें रहेंगी। एक, पाकिस्तान की जमीन पर मौजूद आतंकी संगठनों का इससे कोई लेना देना नहीं है। बिल्कुल उसी तरह, जैसे कश्मीर में पुराने आतंकी संगठनों के नए नाम से छोटे छोटे संगठन खड़े किए गए हैं। दूसरा, पाकिस्तान यह कह सकता है कि पंजाब के लोग खालिस्तान आंदोलन को चला रहे हैं। ये उनका आंदोलन है। इसमें दूसरे देश का कोई हस्तक्षेप नहीं है।ग

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