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बदलाव की राजनीति: कर्नाटक में गुजरात फॉर्मूला लागू करने पर भाजपा में मंथन, जानें चिंता की क्या है वजह

Mon, 25 Apr 2022 05:50 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।

सार

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, जहां कर्नाटक में पूरी की पूरी सरकार बदलने पर विचार हो रहा है, वहीं मध्य प्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही सरकार के वर्तमान ढांचे में बड़ा बदलाव करने पर भी विमर्श हो रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य नेतृत्व के खराब प्रदर्शन का असर लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन पर पड़े।
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बासवराज बोम्मई। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भ्रष्टाचार के आरोपों और कामकाज में सुस्ती को देखते हुए कर्नाटक में गुजरात का फॉर्मूला अपनाने पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। पार्टी ने गुजरात में मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों को हटाकर नई टीम बनाई थी। फिलहाल पार्टी में प्रदेश की सबसे बड़ी आबादी लिंगायत समुदाय को साधे रखने की रणनीति पर विचार हो रहा है। दक्षिण भारत में महज कर्नाटक में भाजपा की सरकार है। यहां करीब डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और पार्टी किसी भी कीमत पर सत्ता गंवाना नहीं चाह रही।

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भाजपा सूत्रों के मुताबिक, जहां कर्नाटक में पूरी की पूरी सरकार बदलने पर विचार हो रहा है, वहीं मध्य प्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही सरकार के वर्तमान ढांचे में बड़ा बदलाव करने पर भी विमर्श हो रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य नेतृत्व के खराब प्रदर्शन का असर लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन पर पड़े। वैसे भी वर्ष 2014 से लेकर अब तक असम को छोड़ कर कोई भी राज्य लोकसभा का प्रदर्शन दोहराने में नाकामयाब रहा है।

इस वजह से कर्नाटक को लेकर चिंता
भाजपा इस राज्य के सहारे दक्षिण के अन्य राज्यों मसलन केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु में अपना आधार बढ़ाना चाहती है। इसी के मद्देनजर कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की जगह बासवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन नेतृत्व परिवर्तन के बाद सरकार पर न सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि सरकार के कामकाज की गति भी बेहद धीमी है। जिस प्रकार राज्य में अल्पसंख्यक विरोधी अभियानों की बाढ़ को श्रीराम सेना ने हाईजैक किया है, उससे भी नेतृत्व बेहद नाखुश है।
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बदलाव के साथ लिंगायत समुदाय की फिक्र
राज्य में लिंगायत समुदाय (17 फीसदी) की आबादी सबसे ज्यादा है। राज्य के पूर्व सीएम येदियुरप्पा (79) इसी समुदाय से थे। भाजपा इस समुदाय का समर्थन बरकरार रखना चाहती है। ऐसे में येदियुरप्पा को साधे रखने के लिए उनके पुत्र बीवाई विजयेंद्र को उपकृत करने समेत कई अन्य रणनीति पर विमर्श हो रहा है। लिंगायत समुदाय में गहरी पैठ के कारण ही भाजपा ने अपने ही मापदंड के इतर 75 साल से अधिक उम्र के येदियुरप्पा को बीते चुनाव में सीएम पद का उम्मीदवार बनाया था।

कई राज्यों में बदलाव की सुगबुगाहट
हरियाणा, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी सरकार के मौजूदा ढांचे में बड़ा बदलाव करने पर विमर्श हो रहा है। हालांकि विमर्श का सिलसिला हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही शुरू हो गया था। इन राज्यों में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन किया था लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी को झारखंड और महाराष्ट्र में सत्ता गंवानी पड़ी, जबकि हरियाणा में पार्टी अपने दम पर बहुमत लाने में नाकाम रही थी।

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