भाजपा लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव 2017 को भी राजनाथ के सहारे साधना चाहती है। जिस तरह वेस्ट यूपी में पहली चुनावी रैली में मोदी के साथ राजनाथ ने जनता से सीधे संवाद किया था, वैसा ही केंद्र सरकार के दो साल पूर्ण होने पर आयोजित रैली में दिखा। विधानसभा चुनाव से कुछ ही माह पूर्व हुई इस रैली में राजनाथ ने सीधे पश्चिम के किसानों की नब्ज पर हाथ रखा। उन्होंने अपने संबोधन में जनता को भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास भी किया।
फरवरी 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने वेस्ट यूपी में चुनावी समर का आगाज किया था। यह रैली मेरठ में हुई थी। इसमें भी नरेंद्र मोदी के साथ राजनाथ सिंह आए थे। तब उन्होंने सीधे जनता की नब्ज पर हाथ रखा था। उन्होंने केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार को किसानों की बदहाली का जिम्मेदार ठहराया था। खुद को ‘किसान पुत्र’ बताते हुए उन्होंने यह बताने का पूरा प्रयास किया था कि वह यूपी के हैं और वेस्ट यूपी की समस्या और यहां के लोगों के दर्द को भली-भांति जानते हैं। अब सहारनपुर रैली में भी कमोबेश यही नजारा था। वादे और बातें कुछ बदली हुई थीं, लेकिन अंदाज वही था। इस बार उनकी बातों में कहीं-न-कहीं 2002 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार का दर्द भी था।
राजनाथ सिंह जनता से सीधे संवाद में कहा कि यूपी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को इतने वोट दिए कि उसकी झोली भर गई। ऐसे में हमारी जवाबदेही बनती है और सरकार उसे समझती है। राजनाथ कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता से काम करना चाहती है। इसीलिए एक साल होने पर रिपोर्ट कार्ड पेश किया गया तो अब खुद प्रधानमंत्री यहां दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करने आए हैं।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर भी उठी चर्चा
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
राजनाथ सिंह ने जिस तरह किसानों और उनकी समस्याओं पर अपना संबोधन केंद्रित किया, उससे साफ हो गया कि भाजपा यूपी में राजनाथ सिंह के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की योजना बना रही है। यही नहीं, सभा में भाजपाइयों के बीच अचानक चर्चा उठी कि पार्टी राजनाथ सिंह को भावी सीएम प्रोजेक्ट कर यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ सकती है।
‘मोदी भी समझते हैं किसानों का दर्द’
राजनाथ ने अपने को सीधे किसानों से जोड़ा। पश्चिम की नब्ज को पहचानते हुए उन्होंने कहा कि वे खुद किसान पुत्र हैं और किसानों का दर्द समझते हैं। इतना कहते ही सभास्थल तालियों से गूंज उठा। राजनाथ ने नरेंद्र मोदी को भी इसमें शामिल कर लिया और कहा कि प्रधानमंत्री भी उनके दर्द को समझते हैं। प्रदेश सरकार किसान हित में केंद्र सरकार की योजनाओं को चलने नहीं दे रही है। उन्होंने किसान बेल्ट में सीधे कहा कि जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा, तब तक हिंदुस्तान खुशहाल नहीं होगा।
किसानों ने बिगाड़ दिया था जुगाड़
राजनाथ सिंह की बातों में इस दौरान पुराना दर्द भी उभरा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में जुगाड़ नामक एक वाहन चलता है। उसका इंजन कहीं का, पहिया कहीं का होता है। इस जुगाड़ को चलाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन जब प्रदेश में उनकी सरकार थी तो उन्होंने किसानों को अपने काम के लिए इस जुगाड़ को चलाने की खुली अनुमति दी थी। इसके बावजूद वर्ष 2002 में इन किसानों ने उनका ही जुगाड़ बिगाड़ दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज इस बात को 14साल हो चुके हैं और अब यह वनवास प्रदेश से समाप्त होना चाहिए।