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SEBI: 'कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी', सेबी प्रमुख माधबी पुरी के मामले में ICICI के जवाब पर भाजपा का तंज

Tue, 03 Sep 2024 12:40 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बैंक ने बयान में कहा कि सेबी चीफ ने बैंक से 31 अक्टूबर, 2013 से रिटायरमेंट का विकल्प चुना था। बैंक में अपनी नौकरी के दौरान उन्हें बैंक द्वारा तय की गई नीतियों के अनुसार ही सैलरी, बोनस, इएसओपी और अन्य रिटायरमेंट बेनेफिट्स का लाभ मिला है।
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सेबी प्रमुख माधबी बुच - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच के मामले में आईसीआईसीआई बैंक की सफाई सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस को एक बार फिर से मुंह की खानी पड़ी है। दरअसल कांग्रेस ने साल 2017 से लेकर 2024 के बीच माधबी पुरी बुच को आईसीआईसीआई बैंक से 16.80 करोड़ रुपये की आय होने पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने इसे सेबी प्रमुख रहते हुए माधबी पुरी बुच पर आईसीआईसीआई बैंक में लाभ के पद पर रहने का आरोप लगाया था। 
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कांग्रेस ने लगाए थे गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि माधबी पुरी बुच मार्च 2022 को सेबी की चेयरपर्सन बनीं, लेकिन सेबी चीफ रहते हुए भी वे तीन जगहों से सैलरी ले रहीं थी, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल और सेबी की सैलरी शामिल है। अब आईसीआईसीआई बैंक ने इसे लेकर बयान जारी किया है। बयान में बैंक ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक ने बताया है कि उसने माधबी पुरी बुच को उनके सेवानिवृत्ति के लाभ के अलावा किसी भी तरह की सैलरी या ईएसओपी (एंपलोयी स्टॉक ऑनरशिप प्लान) का भुगतान नहीं किया है। आईसीआईसीआई बैंक की सफाई पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है।

बैंक ने बयान में कहा कि सेबी चीफ ने बैंक से 31 अक्टूबर, 2013 से रिटायरमेंट का विकल्प चुना था। बैंक में अपनी नौकरी के दौरान उन्हें बैंक द्वारा तय की गई नीतियों के अनुसार ही सैलरी, बोनस, इएसओपी और अन्य रिटायरमेंट बेनेफिट्स का लाभ मिला है। रिटायरमेंट के अलावा उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं दिया गया है।  
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भाजपा ने किया पलटवार
भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'हिंडनबर्ग रिसर्च ने जहां छोड़ा था, वहीं से कांग्रेस ने शुरू किया है और सेबी प्रमुख को निशाना बना रही है, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी है। क्या यह महज संयोग है कि जब भी कांग्रेस कोई फर्जी एजेंडा चलाने का फैसला करती है तो या तो खरगे या फिर पवन खेड़ा को आगे कर दिया जाता है?' 
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