भाजपा के लिए खंडवा लोकसभा सीट सबसे अहम है। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे यहां से सांसद रह चुके हैं। उप चुनावों में इस सीट पर टिकट के लिए मुख्य मुकाबला पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे और दिवंगत सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष चौहान के बीच था। प्रदेश सगंठन ने भी चार नामों का पैनल भाजपा हाईकमान को भेजा था। इन दावेदारों की लिस्ट में सांसद नंदकुमार सिंह के बेटे हर्षवर्धन सिंह का नाम पहले नंबर पर था, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बयान दे चुके थे कि भाजपा परिवार या वंशवाद की पोषक नहीं है। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कयास लग रहे थे कि पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, प्रदेश संगठन इस सीट पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाहता था, क्योंकि यहां 26 फीसदी आबादी ओबीसी वर्ग की है। ऐसे में इस वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी ने ज्ञानेश्वर पाटिल को प्रत्याशी बनाने का फैसला किया है। पाटिल की उम्मीदवारी तय होने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह कि अगर पार्टी स्व. नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष या पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस में से किसी को टिकट देती तो भीतरघात होने की आशंका भी थी। ऐसे में पार्टी ने पाटिल जैसे बेदाग छवि वाले ओबीसी चेहरे पर ही दांव चला। हाल ही में जब प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव खंडवा में फीडबैक लेने जगए थे तब भी पाटिल का नाम सबसे आगे था।
विधानसभा उप चुनाव में इन्हें भी मिला मौका
राज्य की जोबट विधानसभा सीट पर हाल ही में भाजपा में शामिल हुईं सुलोचना रावत पर पार्टी ने भरोसा जताया है। 50 साल से रावत परिवार, कांग्रेस संगठन के लिए काम कर रहा था। उप चुनाव में टिकट की दौड़ में कांग्रेस की तरफ से सुलोचना रावत के बेटे विशाल रावत का नाम जैसे ही बाहर हुआ तो उन्होंने अपने बेटे विशाल के साथ भाजपा ज्वाइन कर ली। सुलोचना रावत साल 1996, 1998 और 2008 में विधायक रह चुकी हैं। साल 1998 में दिग्विजय सरकार में वे नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री भी रही थीं। उनके बेटे विशाल रावत ने साल 2013 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। साल 2018 में टिकट नहीं मिलने पर वे निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे। दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
वहीं, राज्य की पृथ्वीपुर सीट से समाजवादी पार्टी से आए शिशुपाल यादव को टिकट दिया गया है। उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे। यहां से कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह राठौर ने जीत हासिल की थी। वहीं रैगांव विधानसभा सीट से पार्टी ने प्रतिमा बागरी को उम्मीदवार बनाया गया है। प्रतिमा महिला मोर्चा में लंबे समय से सक्रिय रही। प्रतिमा को जुलाई में जिला महामंत्री बनाया गया था।
विधानसभा सीटों पर भी कड़ा है मुकाबला
राज्य में तीन विधानसभा क्षेत्रों रैगांव, जोबट और पृथ्वीपुर में उप चुनाव होने वाले हैं। इन दिनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों में कड़ी टक्कर है। यही कारण है कि दोनों दलों की चुनावी जमावट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री चौहान चुनाव के घोषणा के पहले ही इन सभी क्षेत्रों के दौरे कर चुके है। साथ ही भाजपा ने भी संगठन ने भी चुनाव को लेकर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। जबकि कांग्रेस जनता के बीच शिवराज सरकार की नाकामी को लेकर पहुंच रही है।
जोबट विधानसभा सीट आदिवासी बहुल सीटों में से एक है। यह वर्ग लंबे समय से भाजपा से नाराज चल रहा है। ये सीट कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया के निधन से खाली हुई है। रैगांव सीट पर अजा वर्ग के मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। ये सीट बीजेपी विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई। इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर है।
बुंदेलखंड क्षेत्र की पृथ्वीपुर सीट पर सामान्य और पिछड़ा वर्ग का दबदबा है। कांग्रेस यहां हमेशा से ही आगे रही है। कांग्रेस विधायक और कमलनाथ सरकार में आबकारी मंत्री रहे बृजेन्द्र सिंह राठौड़ के निधन से खाली हुई है। विधानसभा उप चुनाव और खंडवा लोकसभा सीट के लिए प्रदेश में 30 अक्तूबर को मतदान होना है। दो नवंबर को मतगणना होगी। खंडवा लोकसभा सीट सांसद नंदकुमार सिंह चौहान का कोरोना संक्रमण से निधन होने पर खाली हुई थी।