असम में मिली ऐतिहासिक जीत से हासिल ऊर्जा के बाद भाजपा ने मिशन 2019 के लिए अभी से कमर कसना शुरू कर दिया है। इस क्रम में पार्टी की निगाह उन राज्यों पर है, जहां वह लंबे समय से सत्ता में है। इन राज्यों में सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए पार्टी आलाकमान समय रहते नेतृत्व परिवर्तन पर गंभीरता से विचार कर रहा है। खासतौर से गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बदलाव के संकेत हैं, जहां पार्टी लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी है।
गुजरात में अगले साल, जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले साल 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन पर मंथन का सिलसिला शुरू हो चुका है। शीर्ष स्तर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की टीम में फेरबदल के साथ इन राज्यों में भी नेतृत्व बदलने पर गंभीर मंथन हो रहा है।
इस मामले में शीर्ष नेतृत्व की पहली चिंता गुजरात है।
मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल राज्य में पटेल आरक्षण आंदोलन सहित कई सियासी चुनौतियों से जूझ रही हैं। बीते साल निकाय चुनाव में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं होने पर नेतृत्व के कान खड़े हो गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य होने के कारण भाजपा यहां रत्ती भर भी जोखिम नहीं उठाना चाहती। गुजरात के संदर्भ में जल्द ही निर्णय होगा। ऐसा इसलिए कि केंद्रीय नेतृत्व नये चेहरे को भी खुद को स्थापित करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहता है।