नागपुर स्नातक सीट पर हार के बाद भाजपा ने महायुति के सहयोगियों की भूमिका की समीक्षा करने का फैसला किया है। चंद्रशेखर बावनकुले ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए माना कि कुछ कमियां रह गई थीं। पार्टी यह पता लगाएगी कि गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में सहयोगी दलों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई या नहीं। समीक्षा में पार्टी नेतृत्व के निर्देशों और गठबंधन के बीच बनी सहमति के पालन की भी जांच होगी।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हार के बाद भाजपा इसकी वजह तलाशेगी। महाराष्ट्र के मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को कहा कि भाजपा हार की समीक्षा करेगी। पार्टी यह भी पता लगाएगी कि महायुति में शामिल किसी सहयोगी दल ने गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में काम किया या नहीं। भाजपा ने नागपुर स्नातक और पुणे सीटों पर जीत के लिए काफी तैयारी की थी, लेकिन नतीजे उसके पक्ष में नहीं रहे। पार्टी ने चुनाव परिणाम स्वीकार कर लिया है।
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हार की जिम्मेदारी किसने ली और क्या कमियां रहीं?
नागपुर सीट पर हार की जिम्मेदारी बावनकुले ने खुद ली है। वह इस सीट के प्रभारी थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्नातक मतदाताओं से संपर्क किया और जीत के लिए पूरी कोशिश की, लेकिन कुछ कमियां रह गईं। अब पार्टी इन कमियों की पहचान कर हार के कारणों को समझने की कोशिश करेगी।
क्या भाजपा ने शिवसेना पर साथ नहीं देने का आरोप लगाया?
शिवसेना की भूमिका को लेकर सवाल पूछे जाने पर बावनकुले ने सीधे आरोप लगाने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समीक्षा करेगी और पता लगाएगी कि महायुति के किस सहयोगी दल ने गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में काम नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि पार्टी नेतृत्व के निर्देशों और गठबंधन के बीच बनी सहमति का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। बावनकुले ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप के बजाय हम समीक्षा करेंगे कि महायुति के किस सहयोगी ने गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में काम नहीं किया।
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अमरावती और पुणे की सीटों पर क्या हुआ?
बावनकुले ने अमरावती का उदाहरण देते हुए कहा कि शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भाजपा से मदद मांगी थी। इसके बाद भाजपा के विधायकों और सांसदों ने गठबंधन के उम्मीदवार के लिए प्रचार किया। हालांकि, कुछ जगहों पर सहयोगी दलों के बीच तालमेल नहीं दिखा। पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सहयोगियों के बीच दोस्ताना मुकाबला था और भाजपा ने यह सीट जीत ली। शिवसेना ने यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया था।
अब महायुति में किसकी भूमिका की जांच होगी?
बावनकुले के मुताबिक, भाजपा यह पता लगाएगी कि पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन हुआ या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किसी नेता या कार्यकर्ता ने पार्टी की नीति अथवा गठबंधन की सहमति के खिलाफ काम तो नहीं किया। ऐसा करने वालों की पहचान कर उन्हें फटकार लगाई जाएगी। महाराष्ट्र विधान परिषद की पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक सीटों पर 23 अक्तूबर को मतदान हुआ था। मतगणना 27 अक्तूबर को शुरू हुई और 28 अक्तूबर को नतीजे घोषित किए गए। महायुति के प्रमुख घटक भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी हैं।