Delhi Politics: भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने आरोप लगाया है कि आतिशी मार्लेना ने आज के पहले जो भी विभाग संभाले हैं, उसी में उनकी नाकामी दिखाई दे चुकी है। ऐसे में आतिशी दिल्ली के लिए किसी उम्मीद की तरह नहीं दिखाई दे रही हैं और इससे राजधानी का कोई भला नहीं होगा।
आतिशी मार्लेना को दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर आम आदमी पार्टी इसे एक बड़ा कदम बता रही है। पार्टी ने भरोसा जताया है कि आतिशी मार्लेना के नेतृत्व में दिल्ली में विकास कार्य लगातार चलते रहेंगे और राजधानी का विकास होता रहेगा। लेकिन भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने आरोप लगाया है कि आतिशी मार्लेना ने आज के पहले जो भी विभाग संभाले हैं, उसी में उनकी नाकामी दिखाई दे चुकी है। ऐसे में आतिशी दिल्ली के लिए किसी उम्मीद की तरह नहीं दिखाई दे रही हैं और इससे राजधानी का कोई भला नहीं होगा।
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शिक्षा विभाग को लेकर लगाए आरोप
कमलजीत सहरावत ने अमर उजाला से कहा कि आतिशी मार्लेना सबसे पहले मनीष सिसोदिया के सहयोगी के रूप में सामने आई थीं और दिल्ली के शिक्षा मॉडल में काम किया था। उन्होंने ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नौवीं कक्षा के एक लाख बच्चे और ग्यारहवीं कक्षा के 54 हजार से अधिक बच्चों को कक्षा में फेल कर दिया गया या उन्हें ओपेन स्कूल से पढ़ने के लिए स्कूल से बाहर कर दिया गया जिससे स्कूलों का रिजल्ट खराब न हो। उन्होंने कहा कि आतिशी मारलेना मनीष सिसोदिया के इस प्रोजेक्ट में साझीदार थीं। ऐसे में उनकी सबसे बड़ी नाकामी इसी शिक्षा मॉडल में दिखाई दे गई।
जल मंत्रालय को लेकर आतिशी पर बरसीं भाजपा सांसद
उन्होंने कहा कि आतिशी ने जल मंत्रालय का काम संभाला। लेकिन इसी बारिश में साफ दिखाई दे रहा है कि पूरी दिल्ली जगह-जगह पानी में डूबी हुई है। पानी निकलने के लिए निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सिल्ट निकालने में घोटाला किया गया है। यूपीएससी की पढ़ाई कर अपना भविष्य संवारने की उम्मीद लगाने वाले बच्चे दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार के पानी में डूब कर मर गए। उन्होंने कहा कि आतिशी अपनी इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।
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चेहरा बदलने से नहीं बदलेगी सरकार की छवि- सहरावत
क्या आतिशी को मुख्यमंत्री बनाने से दिल्ली सरकार दस साल के एंटी इनकमबेंसी फैक्टर से बच जाएगी? अमर उजाला के इस सवाल पर भाजपा सांसद ने कहा कि जिस दिन अरविंद केजरीवाल पर शराब घोटाले के आरोप लगे थे, यदि उसी दिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया होता तो संभवतः कुछ लोग उन्हें ईमानदार मानते। लेकिन केजरीवाल ने तब इस्तीफा दिया है जब सर्वोच्च अदालत ने उन पर ऑफिस जाने, किसी फाइल पर दस्तखत करने से रोक दिया है। ऐसे में अब उनका इस्तीफा त्याग नहीं कहा जाएगा, बल्कि यह तो उनकी मजबूरी दिखाता है। भाजपा नेता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार अपने गलत कामों के बोझ तले ही डूब जाएगी। मुख्यमंत्री पद पर चेहरा बदलने से दिल्ली सरकार लोगों की नजरों में बेहतर नहीं बनेगी।