प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए बेशक अपनी प्रतिबद्धता जता रहे हों लेकिन सरकार के इस महत्वाकांक्षी अभियान पर कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गंगा की निर्मलता के बारे में सरकार अभी ठीक ढंग से यह भी सुनिश्चित नहीं कर पाई है कि गंगा को प्रदूषित करने में शहरों और गांवों में से किसका-कितना योगदान है।
दूसरी तरफ, हरिद्वार में गंगा का कितना पानी कितना छोड़ा गया इसे मापने के लिए केंद्रीय जल आयोग की अपनी कोई साईट नहीं है। सरकार के अपने ही सांसद अजय मिश्रा ने गंगा की अविरलता को लेकर सवाल दागा है। मिश्रा का कहना है कि हरिद्वार में गंगा नदी में पानी 32 क्यूसेक रहता है जबकि कानपुर पहुंचते ही यह घटकर चार क्यूसेक रह जाता है।
उनका आरोप है कि गंगा की यह स्थिति विभिन्न जगहों पर गंगा से जल निकासी की वजह से है। सांसद के सवाल का जवाब देते हुए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा की अविरलता को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा है कि हरिद्वार में केंद्रीय जल आयोग की ऐसी कोई साइट नहीं है जो कि गंगा नदी में पानी छोड़ने पर नजर रख सके।