भाजपा विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर चोर-चोर के नारे लगाकर टीएमसी सरकार को घेरा। दरअसल भाजपा विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव को लेकर विधानसभा के बाहर टीएमसी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। इसे लेकर टीएमसी नेता बाबुल सुप्रियो ने भाजपा पर निशाना साधा है और पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को विधानसभा के शीतकालीन सत्र से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी का अपमान किया है।
क्या बोले बाबुल सुप्रियो
बाबुल सुप्रियो ने कहा कि 'विधानसभा में विपक्ष की अहम भूमिका होती है। मैं मानता हूं कि हमारे कुछ नेताओं पर आरोप लगे हैं लेकिन जिस तरह से वो (भाजपा) चोर-चोर चिल्ला रहे हैं। मैं ऐसा नहीं करता। मैं सात साल मंत्री रहा...इन्होंने (भाजपा) चुनाव से पहले आसनसोल में कोयला माफिया को पार्टी में शामिल कर लिया। मैंने इसका विरोध किया तो मेरी बेइज्जती की गई। वो बंगालियों के लिए कुछ नहीं कर सकते। क्या उनकी कैबिनेट में कोई भी बंगाली है?'
तापस रॉय ने पेश किया था प्रस्ताव
दूसरी ओर, शुभेंदु ने कहा, भाजपा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। उन्होंने कहा, ''आज (मंगलवार) प्रस्ताव सचिव को सौंपा जाएगा। उल्लेखनीय है कि, मंगलवार को सत्र की शुरुआत से ही बहस गर्म हो गई। सदन में असंसदीय आचरण के लिए विपक्ष के नेता को निलंबित करने का प्रस्ताव तृणमूल विधायक तापस रॉय ने पेश किया। सत्ता पक्ष के अन्य विधायकों ने इसका समर्थन किया।
इससे पहले 28 मार्च 2022 को शुभेंदु समेत पांच भाजपा विधायकों को निलंबित कर दिया गया था। उस सत्र से पहले भाजपा के दो विधायकों को निलंबित कर दिया गया था। कुल सात विधायक निलंबित किए गए थे। हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया गया था। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का शीतकालीन सत्र 24 नवंबर से चल रहा है। ऐसा बताया जा रहा है कि टीएमसी इस सत्र में संघवाद पर हमले पर एक विशेष प्रस्ताव ला सकती है। सीएम ममता बनर्जी खुद इस चर्चा में भाग लेंगी। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा शासित केंद्र सरकार संस्थानों की स्वायत्त प्रकृति और विरासत को खत्म करने का काम कर रही है। यह देश के संघीय ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है।