सत्ता पक्ष ने जद(यू) के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शरद यादव पर तंज कसा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि शरद यादव बिना ब्रिगेड वाली सेना के कप्तान हैं। केन्द्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि शरद यादव द्वारा सांझी विरासत को लेकर किए गए आह्वान को बहुत महत्व देने की जरूरत नहीं है। जेटली के अनुसार जद(यू) के नेता के साथ बिहार की ही पार्टी की इकाई और कोई विधायक नहीं है।
अरुण जेटली और शरद यादव के बीच में अच्छे रिश्ते हैं। वहीं शरद यादव राजनीति के आखिरी पड़ाव में पूरी रौ में हैं। उनका दावा है कि असली जद(यू) वहीं हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भाजपा के साथ सरकार बनाकर बिहार की जनता और महागठबंधन के धर्म से धोखा किया है।
इस बीच कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने भी शरद यादव के दावे को सही ठहराते हुए उन्हें ही असली जद(यू) का नुमाइंदा करार दिया है। जबकि भाजपा के नेता इस पूरे प्रकरण में स्थिति का आकलन कर रहे हैं। पार्टी के एक केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि बिहार में जो जनाधार है, वह नीतिश का है। जद(यू) का कमान एंड कंट्रोल उन्हीं के पास है।
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सूत्र का कहना है कि तीन दिन के बिहार दौरे के दौरान शरद यादव के साथ जो नेता थे, वह जल्द ही राष्ट्रीय जनता दल में चले जाएंगे। शरद यादव के साथ अभी चंद लोग जरूर हैं लेकिन बाद में अलग-थलग पड़ जाएंगे। इस बारे में जद(यू) महासचिव केसी त्यागी का कहना है कि शरद यादव को किसी ने जद(यू) से निकाला नहीं है। वह खुद अपनी राह चुन रहे हैं। त्यागी का कहना है कि शरद यादव के साथ न तो बिहार का एक भी विधायक है और न किसी जिला का अध्यक्ष। चुनाव आयोग में दर्ज पांच राज्यों की इकाईया नीतिश कुमार के साथ हैं। यादव के साथ कुल तीन सांसद भर हैं। ऐसे में जद(यू) उनका कैसे हो गया।
भ्रष्टाचारियों के साथ हैं शरद, शोभा नहीं देता
केसी त्यागी ने शरद यादव द्वारा सांझी विरासत के बैनर तले बुलाए गए सम्मेलन पर करारा हमला बोला। त्यागी ने कहा कि शरद यादव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीति की शुरुआत की थी, लेकिन आज वह भ्रष्टाचारियों का साथ दे रहे हैं। शरद यादव इस तरह का व्यवहार करें, यह उन्हें शोभा नहीं देता। इससे पहले भी केसी त्यागी ने शरद यादव को मर्यादा में रहने की सलाह दी थी।
राज्यसभा से नहीं देंगे इस्तीफा
राज्यसभा सांसद शरद यादव और अली अनवर ने नीतिश कुमार से राजनीतिक लड़ाई को चुनाव आयोग तक ले जाने का मन बनाया है। नीतिश कुमार कुमार के साथ शरद यादव खुलकर झंडा और बैनर की लड़ाई लड़ेंगे। इसके अलावा शरद यादव के साथ आए नेताओं ने तय किया है कि वह अपने किसी भी पद से इस्तीफा नहीं देंगे। यहां तक कि राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा न देने का मन बनाया है।