भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कोलकाता में कहा कि सीबीआई के कुछ अधिकारियों की तृणमूल कांग्रेस के साथ 'सेटिंग' थी। इसका पता चलते ही वित्त मंत्रालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने और जांच में तेजी लाने के लिए भेजा था।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित आईसीसीआर में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए घोष ने कहा कि कुछ सीबीआई अधिकारियों और टीएमसी के बीच इस सेटिंग के कारण ही कोयला घोटाले, पशु तस्करी मामले और स्कूल की नौकरियों में अनियमितताओं की जांच में कोई परिणाम नहीं सामने आ रहा था, जिसके कारण वहां ईडी को भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि सीबीआई के कुछ अधिकारी टीएमसी नेताओं के हाथों बिक चुके थे। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि तृणमूल के कई नेताओं को अब इस बात का डर सता रहा है कि सीबीआई जैसे ईडी के अधिकारियों के साथ सेटिंग नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सीबीआई के कुछ अधिकारियों को पश्चिम बंगाल से हटा दिया गया और अब दवा की खुराक बढ़ा दी गई है।
अपने बयानों को लेकर अकसर चर्चा में रहने वाले दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी का अंत शुरू हो गया है। ईडी के कदम के रूप में बड़े लोगों की गिरफ्तारी के साथ जांच तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि ईडी दोषियों को काटता रहेगा। इसे पालतू नहीं बनाया जा सकता, जो इसे वश में करने की कोशिश करने वालों के कुकर्मों से आंखें मूंद लेगा।
वहीं, टीएमसी ने उनके इन दावों पर पलटवार किया है। तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि 'घोष अपनी टिप्पणियों से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कमतर आंक रहे हैं, जिनके तहत सीबीआई काम करती है।' तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार अपने विरोधियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
गौरतलब है कि ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को स्कूल नौकरी घोटाले में गिरफ्तार किया है, जबकि सीबीआई ने पशु तस्करी मामले में टीएमसी के बीरभूम जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार किया है।