भारत में भी 'अहिंसा मीट' मिलने वाला है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भारत में भी क्लीन मीट का जिक्र छेड़ दिया है और इसे नाम दिया है- 'अहिंसा मीट'। ये ऐसा मीट होता है, जो लैब में तैयार किया जाता है। इसे तैयार करने में किसी जानवर की जान नहीं ली जाती है। यूरोपीय देशों में ऐसे क्लीन मीट के फॉर्मूले को अपनाने की कोशिश पहले ही जारी है। अब मेनका ने कहा है कि भारत भी क्लीन मीट को अपनाने के लिए तैयार है।
हैदराबाद में हुई एक बैठक में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने क्लीन मीट का जिक्र किया है, उन्होंने कहा-
53% लोग परंपरागत मीट छोड़ अहिंसा मीट खाने को तैयार।
मीट खाने वालों में से 66% परंपरागत मीट के साथ अहिंसा मीट भी अपनाने के लिए तैयार हैं।
53% लोग तो अहिंसा मीट मिलने पर परंपरागत मीट छोड़ने तक को तैयार हैं।
46% लोग अहिंसा मीट मिलने पर रोज इसे खरीदने के लिए तैयार हैं।
यूएन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक- 2050 तक दुनिया में मीट की मांग 73% तक बढ़ जाएगी। ऐसे में क्लीन मीट प्रभावी विकल्प हो सकता है।
सबसे पहले 2013 में नीदरलैंड के वैज्ञानिक मार्क पोस्ट ने लैब में क्लीन मीट बनाया था।