उन्होंने सोचा कि जब योजना पूरी नहीं हुई है तो सभी नौकरशाहों के बॉस (मुख्य सचिव) को बुलाएं और काम पूरा करने के लिए उनपर दबाव बनाएं।
कोर्ट ने शनिवार को दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्यों और किन कारणों से पार्टी के नेताओं पर ये आरोप लगे हैं। कोर्ट के सवाल का जवाब देते हुए एडिशनल डीसीपी हरेंद्र सिंह ने कहा कि बैठक रात को रखी गई थी और सभी विधायकों को वहां निजी तौर पर बुलाया गया था। बैठक का समय पहले से ही तय था। क्या वजह थी कि आधी रात को बैठक रखी गई। इससे पहले तो इन विधायकों को कभी देर रात नहीं बुलाया गया। इसकी केवल एक ही मंशा थी, मुख्य सचिव पर काम पूरा करने का दबाव बनाने की। अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
ये था पूरा मामला
दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश 19 फरवरी की देर रात सीएम आवास में बैठक के लिए गए थे। उन्होंने इसके बाद आरोप लगाया कि केजरीवाल के सामने ही आम आदमी पार्टी के विधायकों ने उनके साथ मारपीट की। वहीं केजरीवाल के घर पर हुए इस हंगामें के दौरान वहां मौजूद रहे पूर्व विधायक संजीव झा ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि महज 3 मिनट में उनके साथ मारपीट कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत राशन के मसले पर शुरू हुई थी लेकिन मुख्य सचिव ने उनकी बात सुनने की बजाय कहा कि वह उनके प्रति जवाबदेही नहीं हैं।