ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 1027 करोड़ की कुल आय में से भाजपा ने 758 करोड़ रुपए खर्च किए। रिपोर्ट में दिखाया गया है कि 22.79 करोड़ रुपए स्टाफ की सेलरी पर और विज्ञापनों पर 404 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 264 करोड़ रुपए थी। वहीं चुनावी प्रचार प्रसार पर कुल 567 करोड़ रुपए खर्च हुए। गौर करने वाली बात यह है कि पार्टी ने चुनावी साल में मोर्चा रैली और आंदोलनों पर 35 करोड़ रुपए खर्च किए, वहीं पिछले वित्त वर्ष में 78 करोड़ 90 लाख रुपए रैली-मोर्चों पर खर्च किए थे।
यात्राओं पर 86 करोड़ खर्च
रिपोर्ट से पता चलता है कि भाजपा का प्रशासनिक खर्च भी बढ़ा है मार्च तक 143 करोड़ रुपए प्रशासनिक कार्यों पर खर्च हुए, जबकि पिछले साल 69 करोड़ 78 लाख रुपए प्रशासनिक कार्यों पर खर्च हुए थे। वहीं पिछले साल मुकाबले इस वर्ष भाजपा नेताओं ने सबसे ज्यादा खर्च यात्राओं पर किया है। मार्च, 2018 तक भाजपा नेताओं ने 86 करोड़ 82 लाख रुपए ट्रैवल पर खर्च किए, जबकि मार्च, 2017 तक यह खर्च 31 करोड़ 96 लाख रुपए था। वहीं भाजपा का बिजली और पानी का खर्च भी बढ़ा है, जिस पर 4 करोड़ 94 लाख रुपए खर्च हुए, जबकि पिछले साल यह 3 करोड़ 37 लाख रुपए था। भाजपा ने बैठकों पर 32 करोड़ 64 लाख रुपए खर्च किए, जबकि मार्च 2017 तक यह खर्च 51 करोड़ 65 लाख रुपए था।
भाजपा के पास 496 करोड़ की एफडी
इलेक्टोरल बॉन्ड के अलावा भाजपा की कमाई आजीवन सहयोग निधि से 64 करोड़ (2016-17 में 44 करोड़), मोर्चाओं से मिले 87 लाख 65 हजार (2016-17 में 25 करोड़) और बैठकों से 18 लाख (2016-17 में 4 करोड़ 37 लाख) मिले हैं। भाजपा को इस साल 437 करोड़ रुपए चंदा मिला है, जिसमें से 2017-18 में इलेक्टोरल ट्रस्टों से ही 167 करोड़ रुपए चंदा दिया। रिपोर्ट से पता चलता है कि भाजपा के पास कैश रिजर्व 16 करोड़ 52 लाख रुपए का है, जो पिछले साल के मुकाबले 2 करोड़ 87 लाख रुपए ज्यादा है। जबकि बैंकों में 309 करोड़ रुपए और 496 करोड़ रुपए से ज्यादा फिक्सड डिपोजिट में जमा है।