भाजपा पार्टी की रणनीति इन चार राज्यों में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरने की है। इनमें से तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल और ओडिशा की तर्ज पर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।
हैदराबाद में हालिया राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मिशन दक्षिण भारत राज्य के उद्घोष के बाद भाजपा ने इन्हीं दक्षिणी राज्यों से चार प्रमुख हस्तियों को मनोनयन के जरिए राज्यसभा भेजने की व्यवस्था की। दरअसल पार्टी को कर्नाटक छोड़कर अन्य चार दक्षिणी राज्यों में मुख्य विपक्षी दलों के लगातार कमजोर होने और कांग्रेस की संभावना क्षीण होने में उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।
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पार्टी की रणनीति इन चार राज्यों में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरने की है। इनमें से तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल और ओडिशा की तर्ज पर प्रदर्शन करने की उम्मीद है। इनमें तेलंगाना में मुख्य विपक्षी कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है तो आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल क्रमश: टीडीपी और अन्नाद्रमुक मजबूत विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पर रहे हैं। गौरतलब है कि बीते लोकसभा में केरल समेत इन चार राज्यों की 101 सीटों में से महज चार सीटें ही हाथ लगी थीं।
तेलंगाना-तमिलनाडु पर खास नजर
पार्टी को पता है कि दक्षिण के राज्यों में मजबूत चेहरे की कमी मुख्य समस्या है। इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी ने तेलंगाना और तमिलनाडु पर खुद को केंद्रित किया है। इन राज्यों में पूर्व आईपीएस अधिकारियों क्रमश: बांदी संजय कुमार और के अन्नमलाई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। दोनों अपने बयानों के कारण लगातार सुर्खियों में रहते हैं।
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संजय कुमार प्रजा संग्राम यात्रा का तीसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं। जबकि स्थानीय निकाय चुनावों में अन्नामलाई के नेतृत्व में पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। यहां जयललिता की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक में पुराना जोश नहीं रह गया है जबकि तेलंगाना में कांग्रेस के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है।