देश में बेशक अभी लोकसभा चुनाव दूर हों, लेकिन उठापटक अभी से ही शुरू हो गई है। मंगलवार को कांग्रेस ने अमेरिकी सेब का मुद्दा उठाया और इनपर आयात शुल्क कम करने का विरोध करते हुए दावा किया कि यह हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों के लिए हानिकारक साबित होगा।
विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेब की खेती करने वाले देश के किसानों के साथ अन्याय करते हुए आयात शुल्क कम करके संयुक्त राज्य अमेरिका को उपहार दे रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एआईसीसी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाते हुए कहा कि वोकल फॉर लोकल के नारे का क्या हुआ? प्रधानमंत्री रियायतें देकर अमेरिकियों को खुश करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?
नष्ट हो जाएगी अर्थव्यवस्था
उन्होंने अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क कम करने के कथित आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर देगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, G20 शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता से कुछ दिन पहले, केंद्र ने सेब, अखरोट, बादाम और दाल सहित लगभग आधा दर्जन अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क हटाने की घोषणा की। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये शुल्क 2019 में अमेरिका द्वारा भारत के कुछ स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने के बाद जवाबी कार्रवाई में लगाए गए थे।
70 से घटकर 15 पहुंचा आयात शुल्क
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि एक बार जब मैं प्रतिबद्धता जता देती हूं तो फिर मैं खुद की भी नहीं सुनती, मोदी जी यही करते हैं। मोदी जी ने अडानी और अमेरिका के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता जताई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह पीएम मोदी द्वारा अमेरिका को दिया गया तोहफा है। उन्होंने कहा, अमेरिका में बड़ी कंपनियां सेब की बुआई कर रही हैं, लेकिन यहां इसका उत्पादन केवल जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में होता है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अभूतपूर्व आपदा का सामना कर रहा है और कुल 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। उन्होंने कहा, ''राज्य को सांत्वना और मदद देने के बजाय, मोदी जी हिमाचल के किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं।'' उन्होंने दावा किया कि इससे इन राज्यों की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।
कटौती से पहले सुधर रही थी अर्थव्यवस्था
उन्होंने कहा कि राज्य की जीडीपी का 14 फीसदी हिस्सा सेब की बिक्री से आता है और अब इस पर गंभीर असर पड़ेगा। इसी तरह, उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में, जहां 2019 के बाद पहली बार अर्थव्यवस्था आगे बढ़ने लगी थी, जब लॉकडाउन जैसी स्थिति थी, ऐसे में अब सेब के साथ-साथ अखरोट और बादाम पर आयात शुल्क में कटौती से एक बड़ा झटका लगेगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी सोमवार को केंद्र से अमेरिका से आयातित सेब, अखरोट और बादाम पर अतिरिक्त शुल्क हटाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी।
अमेरिकी सेब और बादाम पर अतिरिक्त आयात शुल्क हटाने से घरेलू उत्पादकों पर कोई असर नहीं
इस बीच, सरकार ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी सेब, अखरोट और बादाम के आयात पर अतिरिक्त जवाबी शुल्क हटाने से घरेलू उत्पादकों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव पीयूष कुमार ने कहा, अमेरिकी सेब एवं अखरोट पर 50 फीसदी और 100 फीसदी का ‘सबसे तरजीही देश’ (एमएफएन) का शुल्क लागू रहेगा क्योंकि सिर्फ 20 फीसदी अतिरिक्त शुल्क ही हटाया गया है। सेब, अखरोट और बादाम पर एमएफएन शुल्क में कोई कटौती नहीं की गई है। यह शुल्क अब भी अमेरिकी मूल की वस्तुओं सहित सभी आयातित उत्पादों पर लागू है। यह स्पष्टीकरण कांग्रेस के सेब पर आयात शुल्क कम करने के सरकार के फैसले की आलोचना के बीच आया है।
अतिरिक्त सचिव ने कहा कि जवाबी शुल्क हटाने से सेब, अखरोट और बादाम के प्रीमियम बाजार श्रेणी में प्रतिस्पर्धा होगी। इससे हमारे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। साथ ही, अब उन देशों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित होगी, जो भारत को इन उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं। अमेरिकी सेब और अखरोट के आयात पर अतिरिक्त जवाबी शुल्क लगाने से अन्य देशों को लाभ होने के कारण अमेरिकी सेब की बाजार हिस्सेदारी घट गई।