सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने युद्ध के दौरान महिला सैन्य कर्मियों की तैनाती पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान तैनाती का फैसला खुद महिला सैन्य कर्मियों को ही करना है, क्योंकि इस दौरान उन्हें वहीं जिम्मेदारियां निभानी होंगी जो कि जवानों को निभानी पड़ती हैं। साथ ही इसके लिए उन्हें कोई विशष सुविधाएं नहीं दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान हालात बिल्कुल अगल होते हैं, लेकिन फिर भी वे तैनाती चाहती हैं तो उन्हें वैसे ही रहना पड़ेगा, जैसे जवान रहते हैं। इस बीच उन्होंने युद्ध मोर्चे के दौरान टैंक में रहने वाले पुरुष जवानों का उदाहरण दिया।
रावत ने कहा कि युद्ध के समय ऐसे हालात हो जाते हैं कि जवानों को बिना शौचालय और बाकी सुविधाओं के रहना पड़ता है। वे एक ही टैंक के अंदर ही खाना बनाते हैं और सोते भी हैं। ये हालात महिला जवानों के हिसाब से ठीक नहीं है। लेकिन वे फिर भी तैनात होना चाहती हैं तो उन्हें समान भूमिका में समान जिम्मेदारियां निभानी होंगी।