भारत दौरे पर पहुंचे माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स ने एक साक्षात्कार में कहा कि मैं इस बात को हमेशा से जानता था कि मुझे समाजसेवी बनना सीखना होगा। उन्होंने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे कंपनी सफल रही, क्योंकि उससे मिलने वाले पैसों से मलेरिया या कुपोषण जैसी चीजों के रोकथाम में मदद कर पा रहा हूं।
'माइक्रोसॉफ्ट के मिले पैसों से मदद कर रहा हूं'
मीडिया एजेंसी को दिए साक्षात्कार में बिल गेट्स ने कहा कि मैं अपने बच्चों को कुछ पैसे देता हूं लेकिन उन्हें अपने खर्च के लिए पैसे की आवश्यकता नहीं होती है। मेरा मानना है कि विरासत में अगर आपको सीमित पैसा मिलती है, तो मतलब है कि बाकी समाज को वापस लौटाने और दुनिया को बेहतर बनाने का प्रयास के लिए उपलब्ध है। इसमें कोई शक नहीं है कि मैं बहुत भाग्यशाली हूं। माइक्रोसॉफ्ट से मिले पैसों से मलेरिया और कुपोषण को रोकने में मदद मिली। तमाम देशों की सरकारों के साथ साझेदारी के जरिए मैं वास्तव में दुनिया की कई समस्याओं को खत्म करने का रास्ता देखता हूं। बिल गेट्स ने कहा कि वह कभी भी उन परिस्थितियों में नहीं रहे जिन्हें आप कठिन परिस्थितियां कहते हैं।
मैं मध्यय वर्गीय परिवार में जन्मा- गेट्स
साक्षात्कार में बिल गेट्स ने कहा कि मेरा जन्म मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। लेकिन मेरे माता-पिता ने परिश्रम कर मुझे एक अच्छे निजी स्कूल में भेजा था। माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी को खड़ा करने के लिए रात-दिन मेहनत की क्योंकि मुझे मेरा उद्देश्य मिल गया था। मुझे हमेशा से ये पता था कि मुझे समाज के लिए कुछ करना है। हालांकि वर्ष 2000 तक मुझे वास्तव में इतना पता नहीं चला था। उस दौरान गेट्स फाउंडेशन बनाया, जो दुनिया में सबसे बड़ा बन गया।
भारत में एआई को लेकर शानदार काम होंगे- गेट्स
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बात करते हुए बिल गेट्स ने कहा कि भारत में एआई को लेकर शानदार काम होंगे। देश में पहले ही एआई पर बहुत शानदार काम हो रहे हैं। इसका लाभ स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों से जुड़े सबसे गरीब लोगों को मदद मिलेगी। हमारे फाउंडेशन को इसे आकार देने में मदद करने पर गौरव महसूस होगा।
वॉरेन बफेट से मेरी दोस्ती 30 साल पुरानी- गेट्स
निवेशक वॉरेन बफेट के साथ अपनी दोस्ती के बारे में बात करते हुए बिल गेट्स ने कहा कि उनके साथ उनकी दोस्ती 30 साल पुरानी है। वास्तव में हमारे व्यवसायों में कभी भी बहुत समानता नहीं थी। वह एक निवेशक है, मैं एक प्रौद्योगिकीविद् हूं। लेकिन दुनिया के बारे में हमारा दृष्टिकोण बहुत समान था। हम दोनों को एक-दूसरे से बात करना अच्छा लगता था। मैंने वॉरेन से कई बार अलग-अलग चीजों के बारे में बात की।