बिलारी विधानसभा का उपचुनाव सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी की साख से जुड़ा है। चुनावी साल से ऐन पहले हो रहा उपचुनाव एक तरह से सपा के लिए एसिड टेस्ट की तरह है। यहां का चुनावी नतीजा सूबे की सियासत के भविष्य का संकेत करेगी।
यही वजह है कि सत्ताधारी दल ने बिलारी का चुनावी समर जीतने के लिए यहां मंत्रियों और विधायकों की फौज लगा रखी है। लेकिन जैसे संकेत हैं सपा को अपनी सीट कायम रखने के लिए काफी पसीना बहना पड़ रहा है।
नाखुश मतदाताओं को मनाने और सीट को दोबारा सपा के खाते में लाने के लिए पार्टी के थिंक टैंक ने मंत्री और नेताओं को उन्हीं की जाति बाहुल्य वाले क्षेत्रों में लगाया गया है। खुद पार्टी के अलंबरदार मानते हैं कि उपचुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए आसान लड़ाई नहीं है।
बिलारी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3.41 लाख है। इसमें बिलारी तहसील क्षेत्र के 289 और चंदौसी तहसील क्षेत्र के 58 बूथ मिलाकर कुल 347 बूथों पर 16 मई को वोट डाले जाने हैं। बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की सड़क हादसे में मौत के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है। दिवंगत विधायक के बेटे फईम को सपा ने टिकट दिया है।
अपनी सीट को वापस पाने के लिए सपा को पसीना बहाना पड़ रहा है। मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, जनप्रतिनिधियों की फौज उतारनी पड़ी है। सपा के फईम इकलौते मुस्लिम प्रमुख प्रत्याशी माने जाने रहे हैं। सूबे के सबसे कद्दावर मंत्री आजम खां ने खुद नामांकन के समय मौजूद रहकर इस बात का स्पष्ट संकेत दे दिया कि पार्टी के लिए इस चुनावी जंग की सियासी अहमियत कितनी है।
बसपा का प्रत्याशी नहीं उतारना भाजपा के इतराने की बजह है, शायद सोंच कर कांग्रेस ने शिशुपाल सिंह जाटव को प्रत्याशी बनाया हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा, लेकिन सपा की तैयारियों से इतना अनुमान तो लगाया ही जा सकता है कि सीट वापसी की राह बहुत आसान नहीं लग रही है।
जातीय समीकरण साधने को लगाई दिग्गजों की फौज
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ठाकुर बाहुल्य क्षेत्रों में पशुधन एवं पंचायत राज कैबिनेट मंत्री राज किशोर सिंह प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मूलचंद चौहान को भी लगाया गया है। जाट बिरादरी के मतदाताओं को साधने के लिए समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय लाठर को उतारा है तो कश्यपों को रिझाने के लिए मत्स्य विकास निगम के चेयरमैन राजपाल कश्यप को लगाया गया है।
मौर्य, सैनी, शाक्य बिरादरियों को साधने का काम कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी के जिम्मे छोड़ा गया है। प्रजापति समाज के लिए कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को लाया गया है। वैश्य समाज में साधने के लिए एमएलसी सरोजनी अग्रवाल, बिजनौर की विधायक रुचि वीरा जुटी हैं। जाटव समाज के लिए पूर्व मंत्री व एमएलसी मनोज पारस, पूर्व सांसद शीशराम सिंह रवि, विधायक लक्ष्मी गौतम व सतीश प्रेमी को लगाया गया है।
वाल्मीकि समाज के लिए सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन जुगल किशोर वाल्मीकि, ब्राह्मण समाज के लिए एमएलसी संजय मिश्रा को लगाया गया है। वहीं मुस्लिम मतदाताओं को समझाने में सपा मुखिया का परिवार खुद उतर आया है।
शिवपाल सिंह यादव सभा कर चुके, गुरुवार को सांसद धर्मेद्र यादव रोड-शो करेंगे। इसके अलावा विधायक रामखिलाड़ी सिंह यादव, विधायक पिंकी यादव, बनवारी सिंह यादव, आशीष यादव, प्रदीप यादव उर्फ गुड्डू यादव समेत कई नेता डेरा डाले हैं तो मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने को लंबी चौड़ी फौज उतारी गई है।
कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद, महबूब अली, कमाल अख्तर, पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क, सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां तो डेरा डाले ही हैं। नगर विकास मंत्री आजम खां भी क्षेत्र में दस्तक दे रहे हैं। इसके अलावा भी सैकड़ों जनप्रतिनिधि व अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों को टीम घर घर जाकर वोट मांग रही है।
बिलारी सीट का जातीय समीकरण
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बिलारी विधान सभा क्षेत्र में एक लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता बताए जा रहे हैं। दूसरे नंबर पर जाटव और यादव मतदाताओं की संख्या है। मौर्य, सैनी मिलाकर भी तीसरी बहुलता पूरी करते हैं। कश्यप, प्रजापति, जाट भी भी अच्छी खासी संख्या में हैं।
आंशिक बिलारी (28 ग्राम पंचायतें) की स्थिति-
यादव बाहुल्य
- रतनपुर स्योंडारा, कुढ़ फतेहगढ़, अटवा केचुरी, बिचैटा काजी, दियोरा खास, बलकरनपुर, जहांगीरपुर, धर्मपुर रत्ता, पेगा रफातपुर, गुरगांव आदि।
ठाकुर बाहुल्य
- सराय ज्वालापुरी, भगतपुर पहेली, फैजुल्लापुर, छावड़ा, खबरिया हुलासनगर, धनूपुरा चड़रौवा आदि।
जाटव बाहुल्य
- गुरसरी, मुड़िया खेड़ा, दारनी, धर्मपुर कुइया, गंदूपुरा आदि।
मौर्य बाहुल्य
- रीठ, बहोरनपुर, मिट्ठनपुर मौजा, मल्लपुर भवानी आदि।