इस घटनाक्रम को भाजपा के साथ नीतीश कुमार के जुड़ने की एक बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार प्रभात कुमार कहते हैं कि नीतीश कुमार का राहुल की न्याय यात्रा में न शामिल होना, यह बताता है कि किस तरह से वह I.N.D.I गठबंधन से दूर हो रहे हैं। बीते दो दिन में उनके जिस तरीके के बयान आए हैं वह भी यह इशारा करते हैं कि वर्तमान सहयोगियों के साथ नीतीश कुमार बहुत सहज नहीं हैं। हालांकि प्रभात मानते हैं कि 2019 और 2024 की परिस्थितियों में बहुत बदलाव आ चुका है। भाजपा ने बीते पांच साल में जातिगत समीकरणों के आधार पर जो फील्डिंग बिहार में सजाई है, उसके आधार पर पर अब बिहार में नीतीश कुमार भाजपा के लिए वह पुरानी मजबूरी नहीं रहे।