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Bihar Politics: इस बार BJP के साथ चलने में नीतीश के सामने हैं ये पेंच, क्या वाकई कमजोर पड़ गए हैं सुशासन बाबू?

आशीष तिवारी
Updated Thu, 25 Jan 2024 06:41 PM IST

सार

सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा ने जातिगत समीकरणों को साधने में बीते पांच सालों में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिछड़ों, अतिपिछड़ों और दलितों को बिहार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर जातिगत समीकरणों के लिहाज से सधी हुई सियासी पारी को आगे बढ़ाया है...
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Bihar Politics - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar


इस घटनाक्रम को भाजपा के साथ नीतीश कुमार के जुड़ने की एक बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार प्रभात कुमार कहते हैं कि नीतीश कुमार का राहुल की न्याय यात्रा में न शामिल होना, यह बताता है कि किस तरह से वह I.N.D.I गठबंधन से दूर हो रहे हैं। बीते दो दिन में उनके जिस तरीके के बयान आए हैं वह भी यह इशारा करते हैं कि वर्तमान सहयोगियों के साथ नीतीश कुमार बहुत सहज नहीं हैं। हालांकि प्रभात मानते हैं कि 2019 और 2024 की परिस्थितियों में बहुत बदलाव आ चुका है। भाजपा ने बीते पांच साल में जातिगत समीकरणों के आधार पर जो फील्डिंग बिहार में सजाई है, उसके आधार पर पर अब बिहार में नीतीश कुमार भाजपा के लिए वह पुरानी मजबूरी नहीं रहे।

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