सेनारी नरसंहार। (प्रतीकात्मक)
- फोटो : AI
बिहार में जातीय हिंसा का लंबा इतिहास रहा है। इसके चलते राज्य में कई नरसंहार हुए। डालेचक-बघौरा, बाड़ा, सेनारी से लेकर बेलछी, बथानी टोला, लक्ष्मणपुर बाथे जैसे नरसंहार शामिल हैं। ‘बिहार के महाकांड’ सीरीज के पांचवें भाग में आज हम आपको ऐसे ही एक नरसंहार के बारे में बताएंगे। इस नरसंहार को बदला नहीं, बल्कि 'बदले का बदला' कहा जाता है। वजह है कि यह हत्याकांड डालेचक-बघौरा के जवाब में किए गए बथानी टोला, लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार का पलटवार था।
आइये जानते हैं सेनारी नरसंहार के बारे में, जिसमें बथानी टोला और लक्ष्मणपुर बाथे में हुए हत्याकांड की तरह दो बातें समान थीं। पहली- तीनों में ही लोगों की हत्या हुई थी। दूसरी- तीनों ही नरसंहार को अंजाम किसी ने नहीं दिया। यानी अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
यहां पढ़ें बिहार के महाकांड सीरीज की अन्य पेशकश
- बिहार के महाकांड: किसी का गला रेता, कहीं छाती काटी, कोई गोलियों से भूना गया; आधी रात को ऐसे चला था खूनी खेल
- बिहार के महाकांड: 10 मिनट में मौत के घाट उतारे गए थे 23 लोग, लाशों के बीच मरने का नाटक कर कई ने बचाई थी जान
- बिहार के महाकांड: जब मजदूरी में 32 रुपये मांगना बना था नरसंहार की वजह, नवजात से लेकर गर्भवती तक हुए शिकार
- बिहार के महाकांड: जब जमीन की जंग में बहा दलितों का खून, इंदिरा की प्रचंड वापसी की राह बनी बेलछी की हाथी यात्रा
- बिहार के महाकांड: दंगा जिसमें गई मुख्यमंत्री की कुर्सी, दंगाइयों ने खेत में गाड़कर 108 लाशों पर उगा दी थी गोभी
कैसे भड़की सेनारी नरसंहार के लिए चिंगारी, कैसे रची गई साजिश?
सेनारी में नरसंहार की चिंगारी के लिए उच्च जातियों के संगठन रणवीर सेना और नक्सली संगठन- माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के बीच जारी टकराव को जिम्मेदार माना जाता है। दरअसल, एमसीसी की तरफ से उच्च जाति के लोगों की हत्या के बाद रणवीर सेना ने मध्य बिहार से इस संगठन को हमेशा के लिए खत्म करने का लक्ष्य रखा। वहीं, लक्ष्मणपुर बाथे हत्याकांड के बाद एमसीसी ने जवाब देने का लक्ष्य रखा।
सेनारी नरसंहार: जिसमें जारी रही अति-वाम दलों की बर्बरता
पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज की रिपोर्ट के मुताबिक, शंकर बिगहा नरसंहार के पीड़ितों की तरह ही सेनारी नरसंहार के पीड़ित भी निर्दोष थे, उनका रणवीर सेना से कोई जुड़ाव नहीं था। यानी उनकी हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि वे उच्च जाति के भूमिहार थे।