Seat ka samikaran: बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज लखीसराय विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से अभी भाजपा के विजय सिन्हा विधायक हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव चंद महीने दूर हैं। सियासी बिसात पर शह मात का खेल भी शुरू हो चुका है। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम लखीसराय विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते हैं लखीसराय सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक लखीसराय जिला भी है। लखीसराय विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मुंगेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट सबसे पहले 1977 के चुनावों में लखीसराय नाम से सीट अस्तित्व में आई। मुंगेर लोकसभा में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं इसमें मुंगेर और जमालपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मुंगेर जिले के हैं। सूर्यगढ़ा और लखीसराय विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र लखीसराय जिले के हैं। मोकामा और बाढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पटना जिले का हिस्सा हैं।
1977 में सबसे पहले हुए चुनाव
1977 में इस सीट पर सबसे पहले चुनाव हुए थे। इस समय यहां से जनता पार्टी के कपिलदेव सिंह ने कांग्रेस के अर्जुन सिंह को 22464 वोट से हरा दिया था।
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1980 में कांग्रेस के मिली जीत
1980 में बिहार में फिर एक बार विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में लखीसराय सीट से कांग्रेस के अश्वनी कुमार शर्मा को जीत मिली। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार यदुवंश सिंह को 9516 वोट से हरा दिया था।
1985 में फिर जनता पार्टी को मिली जीत
1985 में एक बार फिर से लखीसराय सीट पर जनता पार्टी को जीत मिली। इस बार जनता पार्टी के कृष्ण चंद्र प्रसाद सिंह ने कांग्रेस के अश्विनी कुमार शर्मा को 10,813 वोट से हरा दिया था।
1990 में जनता दल को जीत
1990 में भी कृष्ण चंद्र को एक बार फिर से लखीसराय सीट पर जीत मिली थी, लेकिन इस बार उनकी पार्टी अलग थी। पिछली बार वह जनता पार्टी से जीते थे, लेकिन इस बार जनता दल के टिकट पर जीत मिली। कृष्ण चंद्र ने निर्दलीय उम्मीदवार अश्विनी शर्मा को 32,704 वोट से हरा दिया था।
1995: जनता दल को एक बार फिर मिली जीत
1995 में एक बार फिर से जनता दल को ही जीत मिली। लेकिन इस बार जनता दल ने यदुवंश सिंह को मैदान में उतारा था। उन्होंने कांग्रेस के अश्विनी कुमार शर्मा को महज 998 वोट से हरा दिया था।
2000 में कृष्ण चंद्र फिर जीते
2000 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से कृष्ण चंद्र प्रसाद सिंह को लखीसराय सीट से जीत मिली। इस बार उन्होंने यह जीत भाजपा के टिकट पर दर्ज की थी। कृष्ण चंद्र ने राजद के फुलेना सिंह को 12180 वोट से हरा दिया था। लखीसराय सीट पर भाजपा की ये पहली जीत थी।
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहले चुनाव में भाजपा के विजय कुमार सिन्हा को जीत मिली थी। उन्होंने राजद के फुलेना सिंह को 1,448 वोट से हरा दिया था। लगातार हार रहे फुलेमा सिंह को 2005 के दूसरे चुनाव जो कि अक्तूबर में हुए थे, इसमें जीत मिली थी। राजद के फुलेना सिंह ने भाजपा के विजय कुमार सिन्हा मात्र 80 वोट से हराया था।
2010: विजय कुमार सिन्हा की दूसरी जीते
2010 में एक बार फिर से मुकाबला विजय कुमार सिन्हा और फुलैना सिंह के बीच में हुआ। इस बार विजय कुमार सिन्हा ने अपनी सीट जीत दर्ज की। भाजपा के विजय कुमार सिन्हा ने राजद के फुलैना सिंह को 59,620 वोट से हरा दिया था। भाजपा के विजय कुमार सिन्हा ने एक बार फिर से 2015 में भी जीतने में सफल रही। लखीसराय सीट पर यह विजय कुमार सिन्हा की तीसरी जीत थी। इस चुनाव में भाजपा के विजय कुमार सिन्हा ने जदयू के रामानंद मंडल को 6,556 वोट से हरा दिया था। 2017 में जब नीतीश कुमार पाला बदलकर एडीए के साथ आए तो सिन्हा को उस सरकार में श्रम संसाधन मंत्री बनाया गया।
2020 में चौथी बार इस सीट पर विजय कुमार सिन्हा को जीत मिली। भाजपा के टिकट पर उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार 10,483 वोट से हरा दिया था। विजय कुमार सिन्हा 25 नवंबर 2020 से 24 अगस्त 2022 तक बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे। नीतीश के पाला बदलने पर उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। 2024 में जब नीतीश फिर से एनडीए के साथ आए तो विजय सिन्हा को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
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