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Seat ka Samikaran: मुख्यमंत्री-विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं धमदाहा से जीते चेहरे, अब यहां लेशी सिंह का दबदबा

Thu, 17 Jul 2025 08:54 AM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार चुनाव से जुड़ी से खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज धमदाहा विधानसभा सीट की बात। लेशी सिंह यहां से पांच बार विधायक रह चुकी हैंं। जदयू के टिकट पर लेशी सिंह को यहां से लगातार जीत मिलती रही है। 

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धमदाहा विधानसभा सीट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है। चुनाव से पहले हो रही इस कवायद को लेकर विवाद भी जारी है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस चुनावी मौसम में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की 19वीं कड़ी में आज हम धमदाहा विधानसभा सीट की बात करेंगे। 

कभी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की सीट रही धमदाहा में पिछले कई चुनावों से लेसी सिंह का दबदबा है। चर्चित साहित्यकार और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण सुधांशु भी धमदाहा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 

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पहले जानते है धमदाहा सीट के बारे में 

बिहार के 38 जिलों में से एक पूर्णिया जिला है। इस जिले में कुल सात विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें अमौर, बैसी, कस्बा, बनमनखी (एससी), रूपौली, धमदाहा और पूर्णिया विधानसभा सीट शामिल है। पूर्णिया लोकसभा सीट में छह विधानसभा सीटें आती हैं। धमदाहा विधानसभा सीट भी पूर्णिया लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस सीट पर 1957 में पहली बार चुनाव हुए थे। 1957 में सीट पर दो विधायक चुने गए थे। 
 

1951 में धमदाहा-कोढ़ा नाम से थी सीट 

1951 में धमदाहा और कोढ़ा सीट एक ही थी जिस पर दो विधायकों को चुना जाता था। तब इस सीट पर दोनों कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे। इनमें भोला पासवान और लक्ष्मी नारायण सुधांशु शामिल थे। भोला पासवान ने जगरूप मंडल को 10,138 वोट से हराया था। वहीं, लक्ष्मी नारायण सुधांशु ने नरसिंह नारायण सिंह को 11,380 वोट से हराया था।  


 

1957: अस्तित्व में आई धमदाहा सीट

1957 के विधानसभा चुनाव में धमदाहा सीट अस्तित्व में आई। इस चुनाव में भी यहां से दो विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। 1957 में भी भोला पासवान शास्त्री और लक्ष्मी नारायण सुधांशु ही कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीते। 


 

1962: सामान्य सीट में बदली धमदाहा

1962 के विधानसभा चुनाव से धमदाहा सीट से एक विधायक चुना जाने लगा। इस चुनाव से यह सीट सामान्य हो गई। इस चुनाव में यहां से कांग्रेस के लक्ष्मी नारायण सुधांशु को जीत मिली। लक्ष्मी नारायण सुधांशु ने  स्वतंत्र पार्टी के सूर्य नारायण सिंह यादव को 11,469 वोट से हराया था। इस जीत के बाद सुधांशु बिहार विधानसभा के अध्यक्ष बने। 1967 में भी लक्ष्मी नारायण सुधांशु को ही इस सीट से जीत मिली। कांग्रेस के सुधांशु ने संघटा सोशलिस्ट पार्टी के सूर्य नारायण सिंह यादव को 1,801 वोट से हरा दिया। 

1969: कालिका प्रसाद सिंह को जीत

1969 के विधानसभा चुनाव में धमदाहा विधानसभा सीट से कालिका प्रसाद सिंह को जीत मिली। सिंह इस बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे। इससे पहले उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर हार मिली थी। कालिका प्रसाद ने कांग्रेस के जय नारायण मेहता को 1173 वोट से हराया। 

1972 में धमदाहा से कांग्रेस के जय नारायण मेहता को जीत मिली। उन्होंने निर्दलीय सूर्य नारायण सिंह यादव को 6,406 वोट से मात दी। तत्कालीन विधायक कालिका प्रसाद तीसरे नंबर पर खिसक गए। 


 

1977: जनता लहर में जीते सूर्य नारायण सिंह यादव 

1977 में पहली बार इस सीट पर जनता पार्टी के सूर्य नारायण सिंह यादव ने जीत दर्ज की। यादव ने कांग्रेस के राम नारायण मंडल को 19,784 वोट से हरा दिया। 

1980 के विधानसभा चुनाव में भी धमदाहा से सूर्य नारायण सिंह यादव को जीत मिली। यादव इस बार चौधरी चरण सिंह की जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर उतरे थे। उन्होंने कांग्रेस (आई) के जयनारायण मेहता को 7,677 वोट से हराया था। 

1985: कांग्रेस ने एक बार फिर किया सीट पर कब्जा

1985 के विधानसभा चुनाव में धमदाहा सीट से कांग्रेस के अमर नाथ तिवारी ने जीत दर्ज की। दो चुनाव में हार के बाद यह कांग्रेस की वापसी थी। कांग्रेस के अमर नाथ तिवारी ने लोकदल के सूर्य नारायण सिंह यादव को 28,645 वोट से हरा दिया था। 

1990 के विधानसभा चुनाव में भी धमदाहा से कांग्रेस के अमरनाथ तिवारी को ही जीत मिली। इस बार भी उन्होंने सूर्य नारायण सिंह को 12,427 वोट से हराया था।

1995: जनता दल को मिली जीत

1995 में जनता दल के दिलीप कुमार यादव को यहां से जीत मिली।  दिलीप कुमार यादव ने निर्दलीय मधुसूदन सिंह को 8,923 वोट से हरा दिया था। दिलीप कुमार यादव इसके बाद अक्तूबर 2005 में भी यहां से राजद के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 

2000: लेशी सिंह का उदय 

2000 के विधानसभा चुनाव में लेशी सिंह धमदाहा से पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंची थीं।  इसके बाद 2005 (फरवरी), 2010, 2015, 2020 में भी लेशी सिंह को यहां से जीत मिली। उनकी जीत का सिलसिला केवल अक्तूबर 2005 में टूटा जब उन्हें दिलीप कुमार यादव ने हराया था।  

2000 में लेशी सिंह ने समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और तत्कालीन विधायक दिलीप कुमार यादव को 14,021 वोट से हराया। 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे जिसमें फरवरी में पहले चुनाव में लेशी सिंह को विजय मिली। जदयू के टिकट पर लड़ रहीं लेशी सिंह ने राजद के दिलीप कुमार यादव को 9,303 वोट से हरा दिया था। 

अक्तूबर 2005: राजद को मिली पहली जीत

2005 में दूसरे चुनाव अक्तूबर में हुए थे इसमें लेशी सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। दिलीप कुमार यादव को सीट से जीत मिली थी। दोनों पिछली पार्टियों से ही चुनाव लड़ रहे थे। दोनों के बीच जीत हार का अंतर 3,597 वोट का था। 


 
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लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुकी हैं लेशी सिंह

लेशी सिंह को 2010 के बाद से लगातार यहां से जीत मिल रही है। 2010 में जदयू के टिकट पर उन्होंने कांग्रेस के इरशाद अहमद खान को 44,697 वोट से हरा दिया था। 2015 में  जदयू से लेशी सिंह ने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के शिव शंकर ठाकुर उर्फ शंकर आजाद को 30,291 वोट से हरा दिया था। महागठबंधन ने 2015 में यह सीट जदयू को दी थी। इसके बाद दिलीप कुमार यादव ने जन अधिकार पार्टी से चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर रहे। 

 2020 में लेशी सिंह ने फिर जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने राजद के दिलीप कुमार यादव को 33,594 वोट से हराया था। लेशी सिंह नीतीश कैबिनेट में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री भी रही हैं।


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