केंद्र सरकार ने एयर इंडिया के निजीकरण के बाद उसका एकाधिकार खत्म करते हुए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अपने लाखों अफसरों को एयर इंडिया में ही सफर करने की अनिवार्यता से मुक्ति दे दी है। केंद्रीय अधिकारी अब किसी भी एयर लाइन के विमान से सफर कर सकेंगे।
केंद्रीय अधिकारियों व कर्मचारियों के हवाई टिकट अब तीन सरकारी कंपनियों के मार्फत बुक किए जाएंगे। लाखों कर्मचारियों के टिकट बुक करने के एवज में इन कंपनियों को संबंधित एयर लाइनों से कमीशन के रूप में कमाई भी होगी।
केंद्रीय निवेश व लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग की सचिव तुहीन कांता पांडा ने आदेश जारी कहा कि सभी सरकारी कर्मचारियों व अफसरों के लिए अब एयर इंडिया के ही विमानों में सफर करना अनिवार्य नहीं होगा।
एयर इंडिया ने बंद की क्रेडिट सुविधा
इससे पहले टाटा समूह के हाथों में जाने के बाद एयर इंडिया ने सरकारी विभागों को एयर टिकट की उधारी या क्रेडिट सुविधा देना बंद कर दी थी। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों को एयर इंडिया के बकाया के भुगतान करने अब नकद में ही टिकट बुक कराने का आदेश जारी किया था।
केंद्र के कर्मचारियों को पहले इस सरकारी एयर लाइंस से ही सफर करना अनिवार्य था। जहां एयर इंडिया की उड़ानें नहीं होती थीं, वहां उसकी सहयोगी कंपनियों के विमानों में सैर करना पड़ती थी। यदि इन दोनों की उड़ानें नहीं होती थीं तो विभाग या मंत्रालय से अनुमति लेकर ही दूसरी एयर लाइंस के टिकट बुक कराने पड़ते थे।
जहां सरकारी अफसरों को किसी भी एयर लाइंस से सफर की छूट मिल गई हैं वहीं, एयर इंडिया को एक बड़ा ग्राहक वर्ग खोना पड़ा है। अब सरकारी बाबुओं के एयर टिकट तीन सरकारी कंपनियों-बामेर लॉरी, अशोका ट्रेवल्स व आईआरसीटीसी से बुक कराना होंगे।
अभी आठ एयर लाइंस संचालित
देश में अभी आठ एयर लाइंस संचालित हो रही हैं। इनमें एयर इंडिया के अलावा विस्तारा, एयर एशिया, स्पाइस जेट, गो फर्स्ट, इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस व अलायंस एयर शामिल हैं। इनके अलावा कुछ क्षेत्रीय एयर लाइंस भी कुछ रूटों पर उड़ानें संचालित कर रही हैं।