वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि तस्करी नेटवर्क चलाने वाले मास्टरमाइंड पर नकेल कसने और अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए विश्व सीमा शुल्क संगठन के साथ अंतर-सरकारी सहयोग जरूरी है। सीमा शुल्क अधिकारियों को अवैध कारोबार के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए आपस में जानकारी साझा करनी चाहिए।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि दुनियाभर में मादक पदार्थों की तस्करी का आकार 650 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह वैश्विक स्तर पर कुल अवैध अर्थव्यवस्था का 30 फीसदी है, जिसका विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा शुल्क अधिकारियों को इन अपराधों का पता लगाने वाली उन्नत तकनीकें और जानकारियां साझा करनी चाहिए।
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अग्रवाल ने सोमवार को राजस्व सूचना निदेशालय (डीआरआई) की ओर से ‘प्रवर्तन मुद्दों में सहयोग’ विषय पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन में कहा, निर्यात-आयात धोखाधड़ी से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को खतरा होने की बात हम समझते हैं। गैर-कानूनी कारोबार से जुड़े अपराधों का संबंध कई बार धनशोधन एवं आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से भी होता है। ऐसे अपराध आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं।
उन्होंने कहा, इस सम्मेलन का विषय ‘नेटवर्क से लड़ने के लिए नेटवर्क की जरूरत’ को रेखांकित करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को हराने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग एवं समन्वय की निरंतर जरूरत है।
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तस्करी पर नकेल के लिए अंतर सरकारी सहयोग जरूरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि तस्करी नेटवर्क चलाने वाले मास्टरमाइंड पर नकेल कसने और अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए विश्व सीमा शुल्क संगठन के साथ अंतर-सरकारी सहयोग जरूरी है। सीमा शुल्क अधिकारियों को अवैध कारोबार के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए आपस में जानकारी साझा करनी चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये जानकारियां कार्रवाई योग्य हों।
डीआरआई के सम्मेलन में उन्होंने कहा, पिछले 50-60 साल में तस्करी या अवैध तरीके से वस्तुओं के व्यापार की प्रकृति में बदलाव नहीं आया है। अब भी बहुमूल्य धातुओं, नशीले पदार्थों, जंगल या समुद्री से निकले कीमती भंडार की ही तस्करी होती है। ऐसे में तस्करी वाली वस्तुएं कमोबेश पहले की तरह ही हैं।