पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उप चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी की थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग को इस अधिसूचना की सामग्री के संबंध में हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दे दी।
अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया में दखल देने की मांग की गई थी। चुनाव आयोग ने उल्लेख किया है कि अगर भवानीपुर में उप चुनाव नहीं कराए गए तो राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील बिकाश भट्टाचार्य की ओर से उठाए गए तर्कों को देखते हुए चुनाव के लिए जारी अधिसूचना के दो पैराग्राफ की सामग्री के संबंध में एक हलफनामा दायक करने के लिए संक्षिप्त स्थगन की मांग की।
याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायाधीश राजर्षि भारद्वाज की खंड पीठ ने सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 13 सितंबर को हुई सुनवाई में पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा था कि केवल राज्य के मुख्य सचिव ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि उप चुनाव आयोजित किए जाने चाहिए और आयोग ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया था।
इसने अदालत को बताया था कि राज्य सरकार की उप चुनाव कराने के फैसले में कोई भूमिका नहीं है और यह पूरी तरह से निर्वाचन आयोग का फैसला है।
ममता बनर्जी के लिए जरूरी हैं उप चुनाव
विधानसभा में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चयन के लिए भवानीपुर विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस के विधायक सोवानदेब चटोपाध्याय ने इस्तीफा दिया है। इसके बाद यहां उप चुनाव जरूरी हो गए हैं। बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा में हार का सामना करना पड़ा था।
संवैधानिक प्रावधान के अनुसार एक व्यक्ति के पास मुख्यमंत्री पद या मंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने के अंदर विधानसभा की सदस्यता होनी चाहिए। बता दें कि बनर्जी ने पांच मई 2021 को लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की थी।
भाजपा ने निर्वाचन अधिकारी को लिखा पत्र
वहीं, भाजपा ने बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि बूथ में एक समय में पांच से अधिक व्यक्तियों (चार चुनाव अधिकारी और एक मतदाता ) को प्रवेश करने की अनुमति न दी जाए। भाजपा ने मांग की है कि वैध पहचान प्रमाण पत्र के बिना बुर्का पहने मतदाताओं समेत किसी भी व्यक्ति को बूथ में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए।