पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित संदेशखाली गांव इन दिनों चर्चा में है। गांव की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि शाहजहां शेख ने उनकी जमीन पर कब्जा करने के साथ-साथ कुछ महिलाओं के साथ यौन शोषण भी किया है। शाहजहां को गिरफ्तार कर लिया गया है। बंगाल की पूरी सियासत अभी संदेशखाली के ईर्दगिर्द भटक रही है। अब राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने एक टीम गठित की है, जो अवैध रूप से हड़पी गई और मछली फार्म में तब्दील की गई जमीनों का अध्ययन करेगी।
खारे पानी की वजह से खराब हुई जमीन
क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के निलंबित नेता शाहजहां शेख द्वारा कथित तौर पर छीनी गई और अब मूल मालिकों को लौटा दी गई खेतों की ऊपरी मिट्टी मछली पालन के लिए खारे पानी की निकासी के कारण कृषि के लिए अनुपयुक्त हो गई है। इस जमीन को फिर से खेती के लिए उपयुक्त बनाने के लिए हटाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि के बजाय मछली पालन का विकल्प सही होगा।
विशेषज्ञों के साथ चर्चा की
राज्यपाल बोस हाल ही में नई दिल्ली की यात्रा पर आए थे। इस दौरान वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद गए और इस मामले पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की थी। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद उन्होंने समिति का गठन किया जिसमें कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग के पूर्व सचिव एसके पटनायक और एक एफएओ विशेषज्ञ शामिल हैं, जो इस मुद्दे का अध्ययन करेंगे और हड़पी गई जमीन को फिर से इस्तेमाल में लाने के तरीके सुझाएंगे।
250 से अधिक जमीनों को लौटाया
एक अधिकारी ने बताया, 'अब तक 250 से अधिक जमीनों को उनके मूल मालिकों को वापस कर दिया गया है। लेकिन खेतों का विशाल हिस्सा दो-तीन वर्षों से अधिक समय तक मछली फार्मों के खारे पानी में डूबा हुआ था, जिससे ऊपरी मिट्टी को बहुत नुकसान हुआ है। उन जमीनों पर नमक की एक परत जम गई है जो कम से कम अगले पांच से दस वर्षों तक फसल पैदा करने में सक्षम नहीं होगी।
राजभवन के अधिकारी ने कहा, 'नागरिक समाज और सरकार को संदेशखाली के लोगों का विश्वास फिर से हासिल करने और सही स्थान खोजने में उनकी मदद करनी चाहिए।'
खेत का सबसे उपजाऊ हिस्सा ऊपरी मिट्टी
जमीनों की हालत पर बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति चितरंजन कोले ने कहा, 'खेत का सबसे उपजाऊ हिस्सा ऊपरी मिट्टी है और इसमें कार्बनिक पदार्थों व सूक्ष्म जीवों की उच्चतम सांद्रता है जो पौधों को बढ़ने में मदद करते हैं। उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली की भूमि में, खारे पानी से उस परत को नुकसान पहुंचा है और इसे बदलने की आवश्यकता है।'
उन्होंने कहा कि कोई भूमि जितने अधिक समय तक खारे पानी के नीचे रहती है, उसे सही होने में उतना ही अधिक समय लगता है। अगर कोई जमीन एक साल के लिए खारे पानी से भरी रहेगी तो उसे सही होने में दो साल का समय लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि जमीन पर जमा नमक को पहले हटाने की जरूरत है, जिसके बाद खेतों को कम से कम दो-तीन फीट खोदना होगा और फिर ताजा मिट्टी की परत करने की आवश्यकता होगी।
मत्स्य पालन सही विकल्प
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक (फसल) स्वप्न कुमार दत्ता ने कहा कि खेती के बजाय मत्स्य पालन इन जमीनों पर एक सही विकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा कि इन जमीनों को फिर से खेती के लायक बनाने में समय, मेहनत और पैसा लगेगा। इसके बजाय, मछली पालन आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प होगा। सरकार को हस्तक्षेप करने की जरूरत है। संयोग से, जिले और ब्लॉक प्रशासन के कृषि विशेषज्ञों की टीमों ने पहले ही खेतों का दौरा करना शुरू कर दिया है और मिट्टी परीक्षण के लिए नमूने एकत्र कर रहे हैं।
उत्तर 24 परागना जिले के एक अधिकारी ने कहा, 'एक बार रिपोर्ट मिलने के बाद हम यह फैसला कर पाएंगे कि कितना नुकसान हुआ है और क्या किया जा सकता है।'