पश्चिम बंगाल में छापेमारी के दौरान हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हुए हमले के मामले में विवाद गहरा गया है। इस हमले के कथित मास्टरमाइंड तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख के सीमा पार करने को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। इस सवाल को लेकर पिछले हफ्ते राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राज्य सरकार से एक स्पष्ट रिपोर्ट मांगी थी। उन्होंने कहा था कि साफ-साफ बताया जाए कि शेख भारत में मौजूद है या नहीं। अब बताया जा रहा है कि राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें अपना स्पष्टीकरण दे दिया है, जिस पर वह आश्वस्त हैं।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने शुक्रवार को कहा कि वह शाहजहां शेख की गिरफ्तारी में देरी होने पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से आश्वस्त हैं। हालांकि, उन्होंने ज्यादा कुछ बैठक के बारे में खुलासा नहीं किया है।
राज्यपाल ने कहा, 'राज्य सरकार के अधिकारियों ने मुझे इस मामले में अपने विचार बता दिए हैं। उन्होंने मुझे कुछ जरूरी जानकारी दी है। फिलहाल जांच चल रही है। इसलिए इन बातों को मैं गोपनीय रखना चाहूंगा।'
एक घंटे तक चली बैठक
बता दें, गुरुवार शाम को मुख्य सचिव बीपी गोपालिका, गृह सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और डीजीपी राजीव कुमार ने राजभवन में बोस से मुलाकात की और उन्हें संदेशखली घटना की जांच के बारे में जानकारी दी।राजभवन के सूत्रों ने बताया कि बैठक करीब एक घंटे तक चली।
यह पूछे जाने पर कि शाहजहां को तत्काल गिरफ्तार करने के राज्यपाल के निर्देश पर उनका क्या जवाब है, बोस ने कहा, 'मेरा बयान रिकॉर्ड में है और इसमें देरी के कारणों के बारे में मुझे बताया गया है, मैं आश्वस्त हूं और चूंकि जांच जारी है, इसलिए मैं ज्यादा इस बारे में नहीं बता सकता हूं।'
राज्यपाल ने शनिवार को राज्य सरकार से कहा था कि वह इस बारे में एक रिपोर्ट सौंपे कि शाहजहां को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और यह स्पष्ट करने को कहा जाए कि वह भारत में है या सीमा पार कर गया है। वहीं, राशन घोटाले की कार्रवाई के बारे में जानकारी देने को कहा था और इस संबंध में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने के लिए बुलाया था।
यह है मामला
गौरतलब है, पांच जनवरी को पश्चिम बंगाल के राशन घोटाले के मामले में ईडी की टीम टीएमसी नेता शाहजहां शेख के ठिकानों पर छापेमारी करने पहुंची थी। इस दौरान शाहजहां शेख अपने घर पर नहीं मिले। जब ईडी की टीम ने घर में घुसने की कोशिश की तो टीएमसी समर्थकों ने ईडी की टीम पर हमला कर दिया। पथराव में ईडी के कई अधिकारी और केंद्रीय बलों के जवान घायल हुए थे। ईडी ने इस मामले में भी शाहजहां शेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शाहजहां शेख अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
कौन हैं शाहजहां शेख?
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शाहजहां शेख (42 वर्षीय) को 'भाई' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बांग्लादेश सीमा के पास उत्तर 24 परगना के संदेशखली ब्लॉक में मत्स्य पालन में एक छोटे से श्रमिक के रूप में शुरुआत की थी। वह चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उन्होंने संदेशखली में मत्स्य पालन और ईंट भट्टों में एक श्रमिक के काम की शुरुआत की थी।
2004 में शेख ने ईंट भट्टों के यूनियन नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। बाद में वह अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखते हुए स्थानीय माकपा इकाई में शामिल हो गए। जोशीले भाषणों और संगठनात्मक कौशल के लिए पहचाने जाने वाले शेख ने 2012 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।
तब से सत्ता के गलियों में शेख का कद बढ़ा है। 2018 में शेख ने सरबेरिया अग्रहटी ग्राम पंचायत के उप प्रमुख के रूप में प्रसिद्धि हासिल की। शेख को उत्तर 24 परगना के लिए 'मत्सा कर्माध्यक्ष' (मत्स्य पालन के प्रभारी) के रूप में जाना जाता है, जिले के मत्स्य विकास की देखरेख करते हैं। जो राजनीतिक और आर्थिक दोनों क्षेत्रों में उनकी प्रभावशाली स्थिति को दिखाता है।